एक सक्षम और सहायक पारिस्थितिकी तंत्र की बदौलत 400 अरब डॉलर के मील के पत्थर को छूना संभव : शरद कुमार सराफ, फियो अध्यक्ष

एक सक्षम और सहायक पारिस्थितिकी तंत्र की बदौलत 400 अरब डॉलर के मील के पत्थर को छूना संभव : शरद कुमार सराफ, फियो अध्यक्ष

चालू वित्त वर्ष के दौरान निर्यात के लिए 400 अरब डालर के नए मील के पत्थर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फियो के अध्यक्ष श्री शरद कुमार सराफ ने कहा कि निर्यात का यह लक्ष्य न केवल सरकार के आशावाद और विश्वास को दर्शाता है बल्कि समान रूप से व्यापार और उद्योग के आत्मविश्वास को भी दर्शा रहा है। उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल को निर्यातकों के साथ लगातार संपर्क करने और उनके मुद्दों को हल करने के लिए बधाई दी।


विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स को लेकर जारी कई चुनौतियों के साथ निर्यात की बढ़ोतरी दर संतोषजनक से अधिक रही है जो यह दर्शाता है कि उद्योग दूसरी लहर का सामना करने के लिए बेहतर रूप से तैयार है। निर्यात में इस तरह के मील के पत्थर हासिल करने का आधार बताते हुए श्री सराफ ने कहा कि निर्यातकों की ऑर्डर बुकिंग की स्थिति बेहद उत्साहजनक है। इसके अलाव उत्पादन से जुड़ी कई वस्तुओं की कीमत में बढ़ोतरी के कारण कई ऑर्डर बढ़ी हुई लागत के आधार पर फिर से लिए जा रहे हैं जिससे मूल्य के संदर्भ में निर्यात में 10-15 फीसद तक का इजाफा संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में कोरोना अपने पीक पर पहुंच रहा है और उद्योग की मदद से टीकाकरण में तेजी से अर्थव्यवस्था के फिर से पटरी पर आने की उम्मीद है। वहीं, साथ में यह भी स्वीकार करने की जरूरत है कि दूसरी लहर के दौरान सरकार विनिर्माण और निर्यात के लिए काफी मददगार रही है। राज्यों की तरफ से माल की मुक्त अंतरराज्यीय आवाजाही से निर्बाध निर्यात सुनिश्चित किया जा सका है। हालांकि कुछ निर्यातकों को स्थानीय स्तर पर कुछ रूकावट  का सामना करना पड़ा।


फियो के अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक ठोस रणनीति की आवश्यकता होगी और सरकार के सभी मंत्रालयों को निर्यात को राष्ट्रीय प्राथमिकता की तरह देखना होगा। नकदी बढ़ाने के लिए बैंकों को उधार देने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ निर्यात से जुड़े ड्रॉबैक, एमईआईएस, जीएसटी और रोडटेप जैसे सभी लाभों को तुरंत लागू करना होगा। इससे निर्यात फायदे का सौदा बनेगा नहीं तो इन रिफंड में देर करने से निर्यातकों का सारा मुनाफा ब्याज देने में चला जाता है। उन्होंने घरेलू स्तर पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता व्यक्त की और कीमतों को नरम करने के लिए आयात शुल्क में कमी का सुझाव दिया। उन्होंने शिपिंग कंपनियों से माल ढुलाई को तर्कसंगत रूप से बढ़ाने का आग्रह किया क्योंकि सभी हितधारक समान समस्या का सामना कर रहे हैं।

 
श्री सराफ ने कहा कि पीएलआई स्कीम न केवल निर्यात बढ़ाने के लिए एक गेम चेंजर साबित होने जा रही है बल्कि आयात को कम करने में मददगार साबित होगी। क्योंकि वैश्विक व्यापार के प्रमुख क्षेत्रों में पीएलआई स्कीम के तहत निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन, ऑटोमोबाइल और खाद्य प्रसंस्करण निर्यात में बेहद उत्साहजनक रुझान दिख रहे हैं और पीएलआई स्कीम के तहत इन क्षेत्रों में उत्पादन विस्तार के साथ निर्यात में और तेजी आएगी।