रॉर्शाक टेस्ट से समझी मन की परतें, जीजेयू में विद्यार्थियों को मिला प्रैक्टिकल प्रशिक्षण
हिसार, गिरीश सैनी। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि के मनोविज्ञान विभाग में रॉर्शाक इंकब्लॉट टेस्ट पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. पवन कुमार ने विद्यार्थियों को परीक्षण की सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने की।
डॉ. पवन कुमार ने रॉर्शाक टेस्ट के इतिहास, विकास, प्रशासन, पूछताछ प्रक्रिया, प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण, अंक निर्धारण और व्याख्या की जानकारी दी। दूसरे दिन विद्यार्थियों को उदाहरणों के जरिए परीक्षण की व्यावहारिक प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि यह परीक्षण व्यक्ति की धारणा, विचारों, अनुभवों, भावनाओं और ध्यान अवधि को समझने में उपयोगी है। मनोविकृति, पुनर्मूल्यांकन, परामर्श और तंत्रिका संबंधी प्रक्रियाओं में इसकी उपयोगिता पर भी चर्चा हुई।
विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कहा कि नैदानिक मनोविज्ञान में लगातार बदलाव के बावजूद रॉर्शाक टेस्ट का महत्व बना हुआ है। भविष्य के मनोवैज्ञानिकों के लिए इसके सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ भी जरूरी है। कार्यशाला में एडीसीजीसी, बीएससी और पीएचडी के विद्यार्थी व शोधार्थी शामिल हुए। समन्वयक डॉ. स्नेहा मित्तल रहीं, जबकि संचालन भारती देवी और सोनू मान ने किया।

Girish Saini 

