पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत लवणीय भूमि में सफेद झींगा पालन से आमदनी बढ़ाएं किसानः उपायुक्त सचिन गुप्ता

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सफेद झींगा पालन शुरू किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा राज्य की अनुपयुक्त लवणीय भूमि (खारे पानी में) को उपयोग में लाकर बेरोजगार व्यक्तियों को सफेद झींगा पालन करवाकर अधिक आय के स्त्रोत उपलब्ध करवाना है।

पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत लवणीय भूमि में सफेद झींगा पालन से आमदनी बढ़ाएं किसानः उपायुक्त सचिन गुप्ता

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सफेद झींगा पालन शुरू किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा राज्य की अनुपयुक्त लवणीय भूमि (खारे पानी में) को उपयोग में लाकर बेरोजगार व्यक्तियों को सफेद झींगा पालन करवाकर अधिक आय के स्त्रोत उपलब्ध करवाना है।


उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि जिला में 86 हेक्टेयर में झींगा पालन किया जा रहा है। लवणीय भूमि में मत्स्य विभाग के प्रयासों से सफेद झींगा पालन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अपार सफलता मिली। राज्य में खारे पानी से ग्रस्त भूमि को झींगा पालन के उपयोग में लाकर अच्छी आय का साधन उपलब्ध करवाया जा रहा है। सफेद झींगा पालन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तेजी से वृद्धि करता है तथा 120 से 125 दिनों में ही इसका भार 25-35 ग्राम तक हो जाता है।


उपायुक्त ने बताया कि सफेद झींगा पालन 5 पीपीटी से 25 पीपीटी तक के खारेपन में भी किया जाता है। यह अंतर्देशीय पालन के लिए अति उपयोगी है। इसके लारवा का उत्तरजीविता दूसरी प्रजातियों से अधिक है तथा संचय घनत्व भी 30-40 प्रति वर्ग मीटर है अर्थात एक हेक्टेयर जल क्षेत्र में तीन लाख प्रति हेक्टेयर तक संभव है। इसमें 35 प्रतिशत प्रोटीन, 16 प्रतिशत वसा व 3 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होते है तथा मिनरल भी होते है। इसका प्रोटीन सभी आवश्यक अमीनो एसिड से भरपूर होता है।


उपायुक्त ने बताया कि सफेद झींगा की पैदावार 6-9 टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक होती है। प्रति किलोग्राम सफेद झींगा की कीमत लगभग 375-520 रुपये तक होती है। एक हेक्टेयर जलक्षेत्र खारे पानी में मत्स्य किसान द्वारा एक पैदावार /फसल में लगभग 10-15 लाख रुपये तक आय ली जा सकती है। एक वर्ष में सही प्रबंधन द्वारा खारे पानी के झींगा की दो फसल प्राप्त की जा सकती है।