बुजुर्गों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर-द्वार पर ही उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है यूएचएसआरः कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

डेंचर इन ए डे कार्यशाला में हरियाणा भर से 150 दंत चिकित्सक ले रहे प्रशिक्षण।

बुजुर्गों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर-द्वार पर ही उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है यूएचएसआरः कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

रोहतक, गिरीश सैनी। हरियाणा के बुजुर्गों को अब दांतों के इलाज के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यूएचएसआर और हरियाणा सरकार का प्रयास है कि बुजुर्गों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर-द्वार पर ही उपलब्ध कराई जाए। एआई एप की इसमें अहम भूमिका रहेगी और ये सिस्टम पूरे हरियाणा के लिए रोल मॉडल बनेगा।  ये विचार पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि, रोहतक के कुलपति डॉ.एच.के. अग्रवाल ने पीजीडीआईएस (डेंटल कॉलेज) के प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग की दो दिवसीय कांफ्रेंस -डेंचर इन ए डे में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।

कुलपति डॉ. अग्रवाल ने इस कांफ्रेंस का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया और कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज की धरोहर हैं। उम्र के इस पड़ाव में बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाना उनके लिए बहुत कष्टदायी होता है। आज के तकनीकी युग में दांतों का इलाज भी अब डिजिटल तकनीक और एआई से जुड़ गया है। पीजीआईडीएस, रोहतक पूरे हरियाणा में एकमात्र दंत संस्थान है, जहां बिना वेटिंग लिस्ट के कम्पलीट डेंचर बनाए जा रहे हैं।

कुलपति डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पीजीआईडीएस की इस पहल से हरियाणा के हर बुजुर्ग के चेहरे पर मुस्कान आएगी। उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन का प्रयास है कि हरियाणा का कोई भी बुजुर्ग दांत न होने की वजह से कुपोषण का शिकार न हो। बुजुर्गों को घर-द्वार पर ही बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए एआई तकनीक का सहारा लिया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि डेंटल कॉलेज की टीम ने एख विशेष एआई चैटबॉट बनाया है, जो हिंदी में बात करेगा और खुद बुजुर्ग मरीजों को कॉल करके इलाज की तारीख बताएगा। उन्होंने कहा कि संस्थान में पूरे प्रदेश के 150 दंत चिकित्सक प्रशिक्षण ले रहे हैं। साथ ही एआई बेस्ड एल्गोरिथम भी तैयार किया जा रहा है।

डेंटल कालेज की प्राचार्या डॉ. मनु राठी ने बताया कि इस एआई चैटबॉट से बुजुर्ग मरीजों को काफी हद तक राहत मिलेगी और बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्होंने बताया कि एआई द्वारा मरीज को रिपोर्ट से लेकर चिकित्सक परामर्श आदि के बारे में सूचित किया जाएगा। इससे उनका समय, पैसा और शारीरिक तकलीफ तीनों बचेंगे।

डॉ. मनु राठी ने बताया कि एआई मरीज का पूरा एनालिसिस भी ऑनलाइन प्रदान करेगा और इलाज के बाद मरीज की संतुष्टि संबंधी जानकारी भी देगा। इस डाटा से पता चल जाएगा कि कितने मरीजों को फायदा हुआ और कहां सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जेरिएट्रिक पेशेंट्स हमारी प्राथमिकता हैं।

आयोजन सचिव डॉ. पंकज गहलोत ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा हरियाणा के हर जिले के सिविल अस्पताल में इस सुविधा को शुरू करने का विचार है, इसी उद्देश्य से प्रदेश भर से करीब 150 दंत चिकित्सक प्रशिक्षण लेने पहुंचे है। उन्होंने बताया कि इलाज उपरांत की जांच, फॉलो-अप आदि सब प्रक्रियाएं एआई और टेली-मेडिसिन से होंगी और बुजुर्ग मरीजों को बार-बार अस्पताल नहीं आना पड़ेगा। इस दौरान डॉ. जिज्ञासा, डॉ. रितु, डॉ. आर.के. शर्मा, डॉ. हरनीत सिंह, डॉ. विपुल, डॉ. शेफाली सिंगला, डॉ. कोमल के सरोया, डॉ. सार्थक सिंह तोमर, डॉ. कुसुम, डॉ. स्टालिन एम और डॉ. वैभव मौजूद रहे।

प्राचार्या डॉ. मनु राठी ने बताया कि डेंटल कॉलेज में सिर्फ दांत ही नहीं, बल्कि मैक्सिलोफेशियल प्रोस्थेसिस के तहत आर्टिफिशियल आंख, नाक, कान और उंगलियां भी बनाई जाती हैं। कैंसर, ब्लैक फंगस या एक्सीडेंट के बाद जिन मरीजों के चेहरे का हिस्सा चला जाता है, उनके लिए यह वरदान है। एआई और डिजिटल स्कैनिंग से अब ये प्रोस्थेसिस एकदम नेचुरल दिखते हैं।