महर्षि दयानन्द सरस्वती की 201वीं जयंती पर एमडीयू में दो दिवसीय आयोजन शुरू

वैदिक यज्ञ, शोभायात्रा, प्रदर्शनी व राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ हुआ शुभारंभ।

महर्षि दयानन्द सरस्वती की 201वीं जयंती पर एमडीयू में दो दिवसीय आयोजन शुरू

रोहतक, गिरीश सैनी। महर्षि दयानन्द सरस्वती की 201वीं जयंती के उपलक्ष्य में एमडीयू के महर्षि दयानंद एवं वैदिक अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में दो दिवसीय समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ।

 

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह मातू राम यज्ञशाला में वैदिक यज्ञ के साथ हुई। विश्ववारा कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, रुड़की की आचार्या सुकामा यज्ञ ब्रह्मा के रूप में तथा भारतीय पुनर्वास परिषद की पूर्व अध्यक्ष डॉ. शरणजीत कौर यजमान के रूप में मौजूद रही। डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस.सी. मलिक, डॉ. लक्ष्मी गुप्ता डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग, डीन सीडीसी प्रो. विनीता हुड्डा सहित अन्य विशिष्ट जन इस दौरान मौजूद रहे।

 

इसके उपरांत यज्ञशाला से महर्षि दयानंद सरस्वती चौक से होते हुए टैगोर सभागार तक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें प्रतिभागियों ने वैदिक ध्वज और संदेशों के साथ महर्षि दयानन्द के विचारों का प्रचार किया। टैगोर सभागार गैलरी में वेद और महर्षि दयानन्द विषय पर आधारित प्रदर्शनी में महर्षि दयानंद के जीवन, विचारों और सामाजिक सुधार आंदोलनों को चित्रों व दस्तावेजों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।


टैगोर सभागार में वैदिक जीवन दृष्टि और उसकी समकालीन प्रासंगिकता विषय पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ, जिसमें देशभर से आए विद्वानों ने वैदिक दर्शन, सामाजिक सुधार और आधुनिक जीवन में महर्षि दयानन्द के विचारों की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।


बतौर मुख्य अतिथि, केंद्रीय संस्कृत विवि, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने वैदिक अध्ययन की वैश्विक आवश्यकता और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। बीज वक्तव्य पंजाब विवि के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र अलंकार ने दिया। विशिष्ट अतिथि कन्या गुरुकुल रुड़की की आचार्या सुकामा तथा आर्य गुरुकुल खानपुर के आचार्य प्रभु ने वैदिक शिक्षा की परंपरा और उसके सामाजिक योगदान पर अपने विचार रखे।

संगोष्ठी के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता गुरुकुल कांगड़ी विवि, हरिद्वार के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रह्मदेव विद्यालंकार ने की। तकनीकी सत्र में जेएनयू, नई दिल्ली के कुलानुशासक प्रो. सुधीर कुमार, दयानन्द ब्रह्म महाविद्यालय, हिसार के प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार तथा कुरुक्षेत्र विवि से संबद्ध एकीकृत प्रतिष्ठान अध्ययन संस्थान के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. रामचन्द्र ने वैदिक जीवन दृष्टि और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।


सायंकाल आयोजित सांस्कृतिक संध्या में संगीत, भजन व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की मनोहारी झलक प्रस्तुत की गई। इस दौरान आयोजित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में आयुष ने प्रथम, रोहित ने दूसरा तथा दीक्षा ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।