तुम और मेरे सपने

तुम और मेरे सपने

तुमने जब मुझसे कहा -
अब हमारी मुलाकातें
इन जागती आंखों की 
दुनिया में नहीं होंगी,
मैं बस तुम्हारे सपनों में 
ही आया करूंगी। 

उसी वक्त जैसे, 
मुझसे किसी ने
मेरी पूरी उम्र की, 
धड़कनों को, रोककर  
धीरे से पूछ लिया,
“अब भी प्रेम करोगे”
क्या। 

मैंने तुम्हारी ओर देखा,
बहुत देर तक, गौर से देखा,
जैसे विदा होते चेहरे
आखिरी बार -
आत्मा में उतारे जाते हैं।

आंखों में समंदर उतरा,
मन में आया, भावनाओं
का एक तूफान, और 
फिर होंठ कांपे थे मेरे,
मैने कहा- ठीक है,
अगर सपनों में मिलोगी
तो जागना ही छोड़ दूंगा।

मैं रातों को अपनी 
पलकों पर,
तुम्हारे आने की 
आहट रखूंगा,
और नींद को
इबादत की तरह 
ओढ लिया करूंगा।

लोग कहेंगे-
यह लड़का इतना
चुप क्यों रहता है,
इतना सोता क्यों है,
इसे दुनिया की कोई,
 खबर क्यों नहीं है ।

लेकिन, उन्हें क्या मालूम,
मैं रोते हुये और बेचैनी में
किसी ख्वाब के दरवाज़े पर
तुम्हारा मैं इंतज़ार करता हूं।

अब सुबहें-
मुझे अच्छी नहीं लगतीं,
क्योंकि वे तुम्हें 
मुझसे छीन लेती हैं।
मुझे रात चाहिए,
गहरी, बहुत गहरी रात,
जब दुनिया सो जाए
तो तुम मेरे पास आ सको।

मैंने अब-
अपने सारे उजाले
तकिए के नीचे रख दिए हैं,
और सारी इच्छायें
उस बिस्तर के
हवाले कर दी है,
जहां हर रात
तुम्हारी याद
मेरे माथे को सहलाती है।

तुम नहीं जानती, 
“सिर्फ़ सपनों में मिलूंगी’’ 
कहने के बाद नींद मेरे लिए 
मृत्यु जैसी नहीं रही,
बल्कि यह मेरे लिये जीवन का 
दूसरा नाम बन गई है।

अब अगर कभी
मुझे उम्र भर सोना पड़े
सिर्फ इसलिए कि 
किसी एक सपने में
तुम्हारा चेहरा देख सकूं,
तो यक़ीन मानो-
सो जाऊंगा मैं पूरी जिंदगी, 
बिना किसी शिकायत के ।

क्योंकि -
प्रेम में
कभी-कभी
एक सपना ही
पूरी दुनिया से 
ज्यादा सच होता है।

टी शशिरंजन