अनुपस्थिति में पहचान — नमक जैसी अहमियत

अनुपस्थिति में पहचान — नमक जैसी अहमियत

हर चीज़ की कीमत तब समझ आती है, जब वो पास नहीं रहती। जो हमेशा साथ होता है, उसकी अहमियत अक्सर अनदेखी रह जाती है। रिश्तों और लोगों की असली कद्र उनकी गैरहाज़िरी में महसूस होती है। जो आपके होने को हल्के में लेते हैं, उन्हें आपकी कमी सिखा देती है।
अपनी कीमत साबित करने के लिए हमेशा मौजूद रहना जरूरी नहीं।

नमक सा है अस्तित्व, सादा मगर खास,
हो तो स्वाद जीवन में, वरना सब उदास।
जो पास है उसकी कद्र कम ही होती है,
दूरी ही सिखाती है — कौन कितना पास।

ज़िंदगी में हर व्यक्ति और हर रिश्ता नमक की तरह होता है—नज़र नहीं आता, लेकिन उसके बिना सब फीका लगने लगता है। इसलिए अपने अस्तित्व को कम मत आंकिए। जो आपकी अहमियत नहीं समझते, उन्हें समय और दूरी खुद सिखा देती है।

(ललित बेरी)