विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए सभी युवा अपनाएं समावेशी सोचः वीसी प्रो. मिलाप पूनियाँ

विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए सभी युवा अपनाएं समावेशी सोचः वीसी प्रो. मिलाप पूनियाँ

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना व लक्ष्य तभी साकार होगा, जब युवा और सर्वजन समाज में समानता, समावेशिता और संवेदनशीलता के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने केवल समाज में ही नहीं, बल्कि परिवार के भीतर भी समानता की बात की थी। आज जरूरत है कि संविधान की भावना को व्यवहार में उतारा जाए और समाज को समावेशी दृष्टिकोण से देखा जाए और समावेशी समाज बनाने के लिए प्रयास किए जाएँ।

कुलपति मंगलवार को सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज और एससी/एसटी सेल, एमडीयू के संयुक्त तत्वावधान में स्वराज सदन के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का विषय विकसित भारत 2047: समावेशी एवं सुलभ समाज के माध्यम से डॉ. आंबेडकर के विजन को साकार करना रहा।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने विद्यार्थियों से कहा कि वे पिछड़े और वंचित वर्गों को समान अवसर दिलाने तथा समावेशी समाज के निर्माण के लिए आगे बढ़कर काम करें। उन्होंने कहा कि समावेशी दृष्टिकोण और करुणा का भाव आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हर दिव्यांग व्यक्ति में कोई न कोई विशेष क्षमता होती है, जरूरत उस क्षमता को पहचानने और आगे बढ़ाने की है। समाज को दिव्यांगता नहीं, बल्कि व्यक्ति की योग्यता और संभावनाओं को देखने की मानसिकता विकसित करनी होगी।

बतौर मुख्य वक्ता, जेएनयू, नई दिल्ली के डॉ. प्रवेश चौधरी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का विजन केवल संवैधानिक अधिकारों तक सीमित नहीं था, बल्कि वे ऐसे समाज का निर्माण चाहते थे जहां हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिले। उन्होंने कहा कि विवि और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता और मानवता के मूल्य विकसित करना भी है।

विशिष्ट अतिथि सिरतार के प्राचार्य डॉ. ए.डी. पासवान ने कहा कि सुलभ वातावरण और आत्मनिर्भरता से ही दिव्यांगजन समाज में अपनी प्रभावी भागीदारी निभा सकते हैं। सेंटर फॉर डिसेबिलिटी स्टडीज की निदेशिका प्रो. प्रतिमा देवी ने स्वागत भाषण दिया। इस दौरान शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।