गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही साकार होगा विकसित भारत-2047 का संकल्पः महंत बालकनाथ योगी
प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला एवं कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग आयोजित।
रोहतक, गिरीश सैनी। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, हरियाणा के प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला एवं कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग का शुभारंभ बाबा मस्तनाथ विवि में हुआ। भारतीय शिक्षा की दृष्टिः समग्र विकास’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा व्यवस्था, शैक्षिक सुधार, कार्यकर्ताओं की भूमिका और विकसित भारत-2047 के संकल्प पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मुख्य अतिथि एवं बीएमयू के कुलाधिपति महंत बालकनाथ योगी ने अपने संबोधन में विद्यालयी शिक्षा को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास की वास्तविक नींव विद्यालयी शिक्षा से तैयार होती है। यदि विद्यार्थी स्कूल स्तर पर ही कमजोर रह जाता है तो आगे चलकर उसकी शैक्षिक नींव मजबूत नहीं हो सकती। इसलिए विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार आवश्यक है।
महंत बालकनाथ योगी ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को देश के प्रति समर्पित होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। आज विद्यार्थियों के पास डिग्रियां तो हैं, लेकिन व्यावहारिक कौशल और प्रशिक्षण की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है। शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, संस्कार और जिम्मेदारी से जोड़ना होगा। उन्होंने शिक्षा में आधुनिक तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ शिक्षा की बुनियादी नींव भी मजबूत होनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने पर भी बल दिया, ताकि शिक्षक अपना अधिकतम समय और ऊर्जा विद्यार्थियों को शिक्षित करने में लगा सकें। उन्होंने कहा कि विद्यालयी शिक्षा की नींव मजबूत होगी तो उच्च शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में भी बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
प्रांत संयोजक डॉ. देवी भूषण ने अभ्यास वर्ग की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के उद्देश्यों एवं कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा को भारतीय दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित करना न्यास का प्रमुख उद्देश्य है। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सह-संयोजक एवं मुख्य वक्ता संजय स्वामी ने शिक्षा के क्षेत्र में न्यास द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने युवा पीढ़ी की सक्रिय सहभागिता पर विशेष बल देते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के लिए युवाओं को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. जे.पी. यादव (पूर्व कुलपति, आईजीयू मीरपुर) ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण कम करने की आवश्यकता पर भी विचार रखे। अंत में प्रांत संरक्षक डॉ. गजराज आर्य ने आभार व्यक्त किया।
इस दौरान बीएमयू के कुलपति डॉ बी.एम. यादव, प्रो. हितेंद्र त्यागी, आयुष विवि के कुलसचिव प्रो. कृष्णकांत, जीयू के कुलसचिव डॉ. संजय अरोड़ा, एमडीयू के कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल, सहित शिक्षा जगत एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य जन मौजूद रहे।
Girish Saini 

