दोआबा कालेज में आज के बारे में युवाओं की सोच पर चर्चा आयोजित

दोआबा कालेज में आज के बारे में युवाओं की सोच पर चर्चा आयोजित
दोआबा कॉलेज में आयोजित संवादात्मक चर्चा में चन्द्र मोहन उपस्थिति को सम्बोधित करते हुए ।

जालन्धर, 26 सितम्बर, 2026: दोआबा कॉलेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा स्टूडैंट वैल्फेयर कमेटी के संयुक्त रूप से ‘आज के बारे में युवाओं की सोच’ विषय पर चर्चा का आयोजन किया गया । चन्द्र मोहन- वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रधान आर्य शिक्षा मंडल एवं प्रबन्धकीय समिति बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए जिनका हार्दिक अभिनन्दन प्रि. डॉ. प्रदीप भण्डारी, डॉ. सिमरन सिद्धू- विभागाध्यक्षा, प्रो. सुरजीत कौर एवं प्रो. सोनिया कालरा- संयोजको, डॉ. प्रिया चोपड़ा, प्राध्यापकों तथा विद्यार्थियों ने किया । इस चर्चा में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने समकालीन भारत के संदर्भ में युवाओं की आकांक्षाओं, चिंताओं और दृष्टिकोणों पर खुलकर विचार-विमर्श किया।
     चन्द्र मोहन ने कहा कि प्रत्येक पीढ़ी को अपनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और अपने समाधान स्वयं खोजने होते हैं । उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी पहले की अपेक्षा अधिक सशक्त है तथा उसके पास अपनी बात रखने के लिए अधिक अवसर और मंच उपलब्ध हैं । उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को राजनीतिक आख्यानों से आगे बढ़कर विभिन्न मुद्दों का अलग-अलग दृष्टिकोणों से विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए ।
    प्रि. डॉ. प्रदीप भंडारी ने तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संदर्भ में विद्यार्थियों को AI से भयभीत होने के बजाय इसे एक उपयोगी साधन के रूप में अपनाने की सलाह दी, साथ ही मानवीय संवाद, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल के महत्व को रेखांकित किया।
     विद्यार्थी-दृष्टि ने प्रश्न किया कि क्या डिग्री को ज्ञान का अंतिम मापदंड माना जाना चाहिए। अनुकृति ने मुद्रा-नोटों की सामग्री में प्रस्तावित बदलाव, डिजिटल भुगतान तथा उनके संभावित आर्थिक प्रभावों से संबंधित प्रश्न उठाए । जैस्मिन ने युवा पीढ़ी और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बढ़ते पीढ़ीगत अंतर का मुद्दा उठाते हुए प्रश्न किया कि राजनीतिक निर्णय लेने वाले आज के युवाओं की आकांक्षाओं और चिंताओं को किस प्रकार बेहतर ढंग से समझ सकते हैं । सुखराज सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत करते हुए इसकी तुलना अन्य राज्यों से की और सामाजिक समस्याओं पर सूचनापरक एवं प्रमाण-आधारित चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया । सिमरन ने कहा कि आरक्षण की प्रासंगिकता पर चर्चा आवश्यक है क्योंकि राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों एवं सार्वजनिक अभिव्यक्ति के संदर्भ में सभी को सार्वजनिक जीवन में गरिमा बनाए रखनी चाहिए। 
     डॉ. सिमरन सिद्धू, विभागाध्यक्षा, ने विद्यार्थियों से पूछा की कि क्या वे राजनीति को एक पेशे के रूप में अपनाना चाहेंगे। उन्होंने राष्ट्र-निर्माण में युवाओं की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि युवा केवल मतदाता बनकर न रहें, बल्कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय भागीदारी पर भी विचार करें। 
     तकनीक और अध्ययन की आदतों पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. सिमरन सिद्धू ने कहा कि विद्यार्थियों की मोबाइल फोन पर बढ़ती निर्भरता तथा पुस्तकों और पाठ्यपुस्तकों से कम होता जुड़ाव उनकी एकाग्रता, विश्लेषणात्मक क्षमता तथा स्वतंत्र अभिव्यक्ति एवं निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। 
     इस अवसर पर जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन विभाग के 98 विद्यार्थियों सहित स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।