भारंगम में तीसरे दिन मंचित नाटक उमर का परवाना में दर्शाई परिवार के प्रेम, दुख व इंसाफ की कहानी

अंतिम दिन श्रीलंका के कलाकार दिखाएंगे अभिनय कौशल।

भारंगम में तीसरे दिन मंचित नाटक उमर का परवाना में दर्शाई परिवार के प्रेम, दुख व इंसाफ की कहानी

रोहतक, गिरीश सैनी। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित विश्व के सबसे बड़े थियेटर फेस्टिवल भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के 25 वें संस्करण का आयोजन देश के 44 शहरों में किया जा रहा है। हरियाणा में इस आयोजन की मेजबानी का जिम्मा रोहतक स्थित दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा) को मिला है। भारंगम के तीसरे दिन बुधवार को बठिंडा स्थित केंद्रीय विवि, पंजाब के प्रदर्शन एवं ललित कला विभाग की ओर से नाटक उमर का परवाना का मंचन किया गया।

करीब एक घंटा 15 मिनट की अवधि के इस नाटक में एक परिवार के संघर्ष को दिखाते हुए कलाकारों ने प्रेम, दुख व इंसाफ की कहानी के सजीव किया। विजयदान देथा की कहानी पर आधारित इस नाटक का निर्देशन डॉ आदिश कुमार वर्मा ने किया है।

एक लोक कथा पर आधारित उमर का परवाना नाटक की कहानी केसर व बेला की शादी से शुरू होती है। उनकी खुशहाल जिंदगी में एक दुष्ट तांत्रिक आकर सब कुछ उजाड़ देता है। केसर व बेला के विवाह के बाद, उनका जीवन नाटकीय रूप से बदल जाता है, क्योंकि तांत्रिक उनके परिवार के सभी सदस्यों को मारना शुरू कर देता है। बेला किसी तरह तांत्रिक से बच निकलती है और अपने बेटे भानु के साथ एक नया जीवन शुरू करती है। भानु को बड़ा होने पर अपने पूर्वजों के अतीत के बारे में पता चलता है तो वह तांत्रिक से बदला लेने का फैसला करता है, जिसमें वह बाद में सफल होता है और अपने पूरे परिवार को भी पुनर्जीवित कर लेता है।

ये नाटक ऐसी जादुई दुनिया को चित्रित करता है, जो मानती है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है। नाटक में करीब 34 कलाकारों की टीम ने अभिनय किया। रोचक बात यह रही कि भारत के अलग-अलग राज्यों के साथ ही विदेशी कलाकारों ने भी हिंदी व भारतीय भाषाओं में संवाद अदायगी की।

निर्देशक डॉ आदिश कुमार वर्मा ने बताया कि इस नाटक में हरियाणा, बिहार, असम, यूपी व दिल्ली के अलावा श्रीलंका के कलाकारों ने भी हिस्सा लिया। नाटक में श्रीलंका से छह कलाकार हैं, जो हरियाणवी, राजस्थानी व हिंदी में अपने संवाद बोलते हैं और गीत गाते हैं। नाटक में पुवनेन्थिरन रतिकला, दीपक कुमार, नवनीत कुमार, विशाल प्रसाद, राहुल राज, आकाश दीप सिंह सिद्धू, देसराज, देविश्मिता दास, संदीप यादव, कनक शेखावत, शिवम कुमार, सुरेश कुमार, शुभम भारती, संजीव कुमार, पुष्प कुमार राजीव, कृष्ण कुमार चंद्रमोहन, मुरलीधरन अरिथरन, मनुष्का मनोसरी नागलिंगम ने अभिनय किया। संगीत संयोजन संजीव कुमार, आदित्य पॉल, यूसुफ खान, गगन सैनी ने संभाला। वहीं, मेकअप रोहित सैनी, सहायक निर्देशन विशाल प्रसाद, सह निर्देशक जय प्रकाश तिवारी ने किया।

 

कुलपति डॉ. अमित आर्य ने बताया कि भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के अंतिम दिन श्रीलंका के नाटक कोलंबा हठे थोरणा का मंचन किया जाएगा। श्रीलंका की भाषा सिंहली में ही प्रस्तुत इस नाटक में रिश्तों की नाजुकता को दिखाया गया है, जिसकी कहानी तीन हिस्सों में बंटी हुई है। अपूर्वा थिएटर ग्रुप से जुड़े कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ये नाटक एक आधुनिक नाट्य प्रस्तुति है, जो इंसानी रिश्तों की नाजुकता को अलग-अलग तरीकों से दिखाती है।