गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन, नेतृत्व, नीति और राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शकः डॉ. सतीश पूनिया
जीयू में श्रीमद्भगवद्गीताः भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए दार्शनिक और व्यवहारिक मार्गदर्शिका विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन।
गुरुग्राम, रोहतक, गिरीश सैनी। गुरुग्राम विवि के भारतीय ज्ञान एवं भाषा विभाग एवं आईसीपीआर द्वारा श्रीमद्भगवद्गीताः भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए दार्शनिक और व्यवहारिक मार्गदर्शिका विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य गीता के दार्शनिक, नैतिक एवं व्यावहारिक आयामों को समकालीन संदर्भों में पुनर्परिभाषित करना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करना रहा।
बतौर मुख्य अतिथि, सामाजिक और राजनीतिक विचारक डॉ. सतीश पूनिया ने अपने उद्बोधन में गीता को केवल आध्यात्मिक ग्रंथ न मानकर जीवन, नेतृत्व, नीति और राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि गीता के सिद्धांत वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान में अत्यंत उपयोगी हैं।
विशिष्ट अतिथि, प्रो. पंकज कुमार मिश्र (संस्कृत विभाग, सेंट स्टीफेंस कॉलेज, डीयू) ने कहा कि गीता भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा है, जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए संतुलन, विवेक और नैतिक दिशा प्रदान करती है।
उद्घाटन सत्र के अंतर्गत एक विशेष मुक्त चर्चा नीति, राजनीति एवं गीता विषय पर आयोजित की गई। डॉ. सतीश पूनिया की पुस्तक अग्निपथ नहीं जनपथः संवाद से संघर्ष तक पर आधारित इस सत्र में गीता के सिद्धांतों और समकालीन राजनीतिक विमर्श के मध्य संबंधों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
कुलपति एवं कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. संजय कौशिक ने कहा कि जीयू भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन और प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन अकादमिक विमर्श को नई दिशा देते हैं और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से भाग ले रहे विद्वान, शोधार्थी और शिक्षाविद विभिन्न तकनीकी सत्रों, शोध पत्र प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श के माध्यम से गीता के बहुआयामी स्वरूप पर गंभीर मंथन करेंगे। इस दौरान कुलसचिव डॉ संजय अरोड़ा, डॉ राकेश योगी, प्रो. नीरा वर्मा, डॉ सुप्रिया सहित अन्य अधिकारी, प्राध्यापक एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।

Girish Saini 

