14 साल के ब्रेन डेड मासूम बालक के अंग दान ने भरी 6 लोगों के जीवन में रोशनी

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल सहित परिजनों व पीजीआईएमएस स्टाफ ने नम आंखों से दी विदाई।

14 साल के ब्रेन डेड मासूम बालक के अंग दान ने भरी 6 लोगों के जीवन में रोशनी

रोहतक, गिरीश सैनी। गत 20 मई को पीजीआईएमएस के ट्रॉमा सेंटर में लाए गए झज्जर जिले के बादली क्षेत्र के एक गांव के 14 वर्षीय बच्चे के ब्रेन डेड होने का बाद परिवार द्वारा अंगदान का फैसला मानवता की एक मिसाल बन गया।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने भावुक स्वर में बताया कि इस दर्द की घड़ी में परिजनों ने जो हिम्मत दिखाई, वो समस्त मानव जाति के लिए मिसाल है। उन्होंने बताया कि इस मासूम बालक के अंगदान से 6 लोगों को नया जीवन मिलेगा। 2 किडनी पीजीआईएमएस के ही दो मरीजों को लगेंगी। वहीं 2 कॉर्निया से दो लोगों को आंखों की रोशनी मिलेगी। बालक का लिवर दिल्ली आईएलबीएस भेजा गया है, जहां स्प्लिट लिवर तकनीक से उसे 2 मरीजों में लगाया जाएगा।

कुलपति डॉ. अग्रवाल ने कहा कि दो महीनों में पीजीआई का ये पांचवा सफल अंगदान एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के मार्गदर्शन में हरियाणा को अंगदान में देश का अग्रणी राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है।

आईसीयू इंचार्ज डॉ. तरुण यादव ने बताया कि जब बालक को लाया गया ता तो उसकी सांसें उखड़ रही थी। सिर की चोट के साथ-साथ किडनी में भी काफी समस्या थी। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अंकुर गोयल के साथ मिलकर उनकी टीम ने भरसक प्रयास किए। उपचार से दो दिन के भीतर ही मरीज की किडनी की कार्यप्रणाली चमत्कारिक रूप से सुधर गई और सामान्य हो गई। किडनी ठीक होने पर आस बंधी लेकिन 22 मई की सुबह चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल के नेतृत्व में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अमरनाथ, डॉ तरुण और डॉ महिपाल की टीम ने जांच में पाया कि बच्चा अब ब्रेन स्टेम डेड है।

ऐसे में सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉ सुखबीर सिंह, ट्रांसपोर्ट कोऑर्डिनेटर रोहित, दीप्ति और मीडिया सलाहकार राजेश कुमार ने बालक के परिवार को अंगदान का महत्व बताते हुए समाज के लिए ये नेक कार्य करने का सुझाव दिया। परिवार ने भीषण दुख की घड़ी में भी दूसरों को जीवन दान देने का फैसला लेते हुए अंगदान के लिए हामी भरी।

निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने इस अंगदान को एक यज्ञ की संज्ञा दी। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि कमेटी ने करीब 6 घंटे के अंतराल पर दो बार सभी टेस्ट किए। एप्निया टेस्ट, ब्रेन स्टेम रिफ्लेक्स टेस्ट के बाद ही ब्रेन डेड घोषित किया गया। उन्होंने कहा कि अंग अलॉट करने की प्रक्रिया करीब सारी रात चली और सुबह 6 बजे से रोहतक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी।

14 साल के मासूम के पार्थिव शरीर को ट्रॉमा सेंटर से बाहर निकालने के दौरान 21 गार्डों ने सम्मान के साथ सलामी देकर श्रद्धांजलि दी। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल सहित अन्य अधिकारियों, व पीजीआईएमएस स्टाफ ने भावुकता के साथ बालक को अंतिम विदाई दी।

सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह ने बताया कि झज्जर, रोहतक और दिल्ली पुलिस ने मिलकर ग्रीन कॉरिडोर बनाया और 70 किमी की दूरी मात्र 48 मिनट में पूरी की गई।

मासूम वालक के पिता ने रूंधे गले से कहा कि मौत के बाद भी अगर किसी का जीवन बचा सकें तो इससे बड़ा धर्म नहीं। उन्होंने कहा कि ब्रेन डेड होने पर अंगदान का निर्णय लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। इस दौरान डॉ लव शर्मा, डॉ जितेंद्र जाखड़, डॉ पंकज छिक्कारा, डॉ योगेश, डॉ अंकुर, डॉ विवेक ठाकुर, डॉ गौरव, दीप्ति, राजेश भड़, रोहित, संजय, दिलबाग सहित अन्य स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।