नए स्वरूप वीबी जी-राम-जी से पुराना मनरेगा होगा और अधिक प्रभावी, जवाबदेह व जन केंद्रितः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ।

नए स्वरूप वीबी जी-राम-जी से पुराना मनरेगा होगा और अधिक प्रभावी, जवाबदेह व जन केंद्रितः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। प्रौद्योगिकी के लगातार उपयोग और नेतृत्व की इच्छाशक्ति के कारण सरकारी कामकाज और आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता आई है। ये विचार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने चार दिवसीय महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अंतर्गत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। खंड संसाधन व्यक्ति के लिए सामाजिक अंकेक्षण विषय पर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ वजीर सिंह ने मुख्य अतिथि डॉ. चौहान का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में 100 रूपये में से 15 रूपये ही वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचते थे। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसान सम्मान निधि के 2000 रुपए के बटन पर अंगुली दबाते हैं तो पूरे 2000 रुपए करोड़ों किसानों के बैंक खाते में खटाक से पहुंचते हैं। ये क्रांतिकारी बदलाव पूर्ववर्ती मनरेगा और उसके नए स्वरूप वीबी जी-राम जी में भी दिखना चाहिए।

डॉ चौहान ने कहा कि मनरेगा के नए स्वरूप वीबी जी-राम-जी के माध्यम से पुराने मनरेगा को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह व जन केंद्रित बनाया जाना है। समय पर भुगतान, डिजिटल निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण और स्थानीय भागीदारी के जरिए मनरेगा की परिकल्पना को जनता के बीच सही रूप में समझाना और पहुंचाना आज की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बने और विकसित भारत के लक्ष्य में सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सामाजिक अंकेक्षण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निदेशक डॉ. चौहान ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण से न केवल योजनाओं की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि जनता का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होता है। यह प्रक्रिया भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सुशासन को सुदृढ़ करने का सशक्त साधन है। अपने संबोधन में हिंदी भाषा में कार्य करने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और प्रशासन की भाषा भी। जब हम हिंदी में कार्य करते हैं तो आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित होता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को ये संकल्प दिलवाया कि वे अपने शासकीय एवं कार्यालयीन कार्य अधिक से अधिक हिंदी में करेंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित महिला प्रतिभागी ने भाषा और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान है और इसे व्यवहार में अपनाना ही सच्ची जागरूकता है। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने सामाजिक अंकेक्षण, पारदर्शिता, सुशासन एवं हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी चार दिनों तक विभिन्न सत्रों के माध्यम से संचालित किया जाएगा।