संत परंपरा का संदेश: सेवा, सद्भाव और मानवता सर्वोपरि — राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष

रोहतक के बाबा सांवल शाह आश्रम में वार्षिक यज्ञ संगम, राज्यपाल ने दिया मानव सेवा का संदेश

संत परंपरा का संदेश: सेवा, सद्भाव और मानवता सर्वोपरि — राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष

रोहतक, गिरीश सैनी। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को प्रेम, करुणा, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखाया है। सच्ची आध्यात्मिकता पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा और समाज कल्याण में निहित है।

राज्यपाल रविवार को रोहतक स्थित टिकाणा संत बाबा सांवल शाह आश्रम में महंत बाबा प्रेमदास की स्मृति में आयोजित वार्षिक यज्ञ संगम एवं भंडारे में संबोधित कर रहे थे। इस दौरान प्रथम महिला मित्रा घोष भी उपस्थित रही।

राज्यपाल ने कहा कि यज्ञ त्याग, समर्पण और लोकमंगल का प्रतीक है, जबकि भंडारा समानता, सेवा और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने युवा पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से जोड़ने और संतों की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

प्रथम महिला मित्रा घोष ने ईश्वर के स्मरण और भक्ति को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए सभी के सुख-समृद्धि की कामना की।

महंत राघवेंद्र भारती ने नशामुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि पानीपत में आयोजित यात्रा को 5,000 से अधिक लोगों का समर्थन मिला। उन्होंने नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की सराहना की।

समारोह में पुलिस अधीक्षक गौरव राजपुरोहित, राज्य सूचना आयुक्त अमरजीत सिंह, समाजसेवी राजेश जैन सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।