एक-दूसरे से जुड़ी है इंसान, पशु और पर्यावरण की सेहतः एम्स विशेषज्ञ डॉ. राणा
सीबीटी में वन हेल्थ अवेयरनेस वर्कशॉप-कम-टॉक आयोजित।
रोहतक, गिरीश सैनी। मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से सीधे जुड़ा है। पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों यानी जूनोटिक बीमारियों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, पशु विशेषज्ञों और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। यह बात एम्स, नई दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. मणिपाल राणा ने एमडीयू के सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (सीबीटी) में आयोजित वन हेल्थ अवेयरनेस वर्कशॉप-कम-टॉक में कही।
वर्किंग टुगेदरः प्रिवेंटिंग जूनोसेस थ्रू कम्युनिटी एक्शन विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. राणा ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से संवाद करते हुए वन हेल्थ की अवधारणा और जूनोटिक रोगों की रोकथाम पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी है। किसी एक क्षेत्र की अनदेखी संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है।
उन्होंने कहा कि जूनोटिक बीमारियों की रोकथाम में जन जागरूकता की अहम भूमिका है। लोगों को संक्रमण के संभावित स्रोतों, बचाव के उपायों और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच अपनाने और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी समाज तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
सीबीटी निदेशक प्रो. रितु गिल ने डॉ. राणा का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा और प्रयोगशाला से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर देते हैं।
इस दौरान फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज की डीन प्रो. मीनाक्षी वशिष्ठ, प्रो. रितु गिल, प्रो. सर्वजीत सिंह गिल, सीबीएलयू भिवानी के प्रो. संजीव कुमार और एम्स नई दिल्ली के प्रो. विक्रम सैनी मौजूद रहे। एमएससी विद्यार्थियों और पीएचडी शोधार्थियों ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करते हुए वन हेल्थ और जूनोटिक रोगों से जुड़े विषयों पर जानकारी हासिल की।

Girish Saini 


