रोहतक का इतिहास, विरासत और विकास अब एक दस्तावेज में दर्ज

संशोधित जिला गजेटियर जारीः उपायुक्त सतबीर सिंह

रोहतक का इतिहास, विरासत और विकास अब एक दस्तावेज में दर्ज

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा कि संशोधित रोहतक जिला गजेटियर-2025 जिले के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध विरासत, सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं और विकास यात्रा को प्रमाणिक रूप से संजोने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसका विमोचन हाल ही में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किया गया।

करीब 650 पृष्ठों का यह प्रकाशन वर्ष 1966 में हरियाणा गठन के बाद प्रकाशित जिला गजेटियरों की श्रृंखला का 15वां प्रकाशन है। यह 1970 में प्रकाशित रोहतक जिला गजेटियर का पहला संशोधित संस्करण है। इसमें 19 अध्यायों के अलावा 72 तालिकाओं वाला परिशिष्ट और 40 पृष्ठों में रंगीन चित्र शामिल हैं।

उपायुक्त ने कहा कि गजेटियर जिले की ऐतिहासिक एवं समकालीन पहचान को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। संशोधित संस्करण में भूगोल, इतिहास, जनसंख्या, समाज एवं संस्कृति, कृषि, उद्योग, बैंकिंग, व्यापार, परिवहन, आधारभूत ढांचा, प्रशासन, कानून एवं न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन समेत विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी दी गई है। साथ ही पिछले पांच दशकों में हुए विकास, शिक्षा एवं चिकित्सा के प्रमुख केंद्र के रूप में रोहतक के उभार, खेल अवसंरचना तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जिले की बढ़ती भूमिका को भी समाहित किया गया है।

महाभारत काल से जुड़ा है रोहतक का इतिहास

गजेटियर के अनुसार रोहतक का प्राचीन नाम रोहितक था, जिसका उल्लेख महाभारत में पांडव योद्धा नकुल के पश्चिमी अभियान के संदर्भ में मिलता है। माना जाता है कि रोहेरा वृक्षों के वन के कारण क्षेत्र का नाम रोहितक पड़ा। पुरातात्विक साक्ष्य रोहतक में प्राचीन मानव बस्तियों की मौजूदगी की पुष्टि करते हैं। खोखराकोट के प्राचीन टीले हड़प्पा सभ्यता से जुड़े अवशेषों के ऊपर स्थित माने जाते हैं।

गजेटियर में रोहतक के राजनीतिक इतिहास को विभिन्न कालखंडों के संदर्भ में दर्ज किया गया है। पृथ्वीराज चौहान के शासन से लेकर मुहम्मद गौरी, दिल्ली सल्तनत, मुगल, मराठा और ब्रिटिश काल तक के घटनाक्रम का विवरण इसमें शामिल है। वर्ष 1948 में दुजाना रियासत के विलय से जिले ने वर्तमान स्वरूप की दिशा में कदम बढ़ाया। वर्ष 1966 में हरियाणा गठन के समय रोहतक प्रदेश के सात मूल जिलों में शामिल था। बाद में सोनीपत और झज्जर अलग जिले बने।

शोधार्थियों और आमजन के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री

डीसी सतबीर सिंह ने कहा कि संशोधित गजेटियर शोधार्थियों, इतिहासकारों, योजनाकारों, पत्रकारों, विद्यार्थियों और आम जनता के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री साबित होगा। इसकी प्रतियां पंचकूला स्थित राजकीय प्रेस के सेल डिपो में बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगी तथा जिला पुस्तकालयों और राज्य के विश्वविद्यालयों में भी पहुंचाई जाएंगी।

उन्होंने बताया कि गजेटियर को जल्द ही राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे रोहतक के इतिहास, विरासत और समकालीन विकास से जुड़ी जानकारी तक आमजन और शोधकर्ताओं की आसान पहुंच सुनिश्चित होगी।