क्लबफुट से कोई बच्चा दिव्यांग न रहे, यही लक्ष्यः कुलपति डॉ. अग्रवाल

पीजीआईएमएस में 174वीं पोंसेटी मेथड रिफ्रेशर ट्रेनिंग; हरियाणा में 528 से अधिक बच्चों का निःशुल्क उपचार

क्लबफुट से कोई बच्चा दिव्यांग न रहे, यही लक्ष्यः कुलपति डॉ. अग्रवाल

रोहतक, गिरीश सैनी। जन्मजात टेढ़े पैर यानी क्लबफुट किसी बच्चे के सामान्य जीवन की राह में बाधा न बने, इसके लिए पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि व पीजीआईएमएस, रोहतक प्रदेशभर में जागरूकता और उपचार अभियान को आगे बढ़ा रहा है। कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने शनिवार को आयोजित 174वीं रिफ्रेशर ट्रेनिंग ऑन पोंसेटी मेथड ऑफ क्लबफुट मैनेजमेंट को संबोधित करते हुए कहा कि देश में क्लबफुट के कारण एक भी बच्चा दिव्यांग न रहे, यही चिकित्सा जगत का लक्ष्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय पर सही उपचार मिलने पर जन्मजात टेढ़े पैरों की विकृति को प्रभावी ढंग से ठीक किया जा सकता है। यह केवल पैर सीधा करने का उपचार नहीं, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास, भविष्य और परिवार की उम्मीदों को नई दिशा देने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित और संवेदनशील चिकित्सक तैयार करना है, जो गरीब परिवारों के बच्चों तक भी विश्वस्तरीय और निःशुल्क उपचार पहुंचा सकें।

कुलसचिव एवं हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूप सिंह ने बताया कि पीजीआईएमएस और क्योर इंडिया इंटरनेशनल ट्रस्ट की साझेदारी 2013 से जारी है। इस दौरान हरियाणा में 528 से अधिक बच्चों का उपचार किया जा चुका है। प्रदेश में सरकार के सहयोग से छह विशेष क्लबफुट केंद्र संचालित हैं, जहां पोंसेटी पद्धति से निःशुल्क इलाज किया जाता है।

उन्होंने बताया कि क्लबफुट में बच्चे का पैर अंदर और नीचे की ओर मुड़ा होता है। उपचार जन्म के शुरुआती सप्ताहों में शुरू करना सबसे बेहतर रहता है। विशेष प्लास्टर से पैर को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाया जाता है और जरूरत के अनुसार छोटी प्रक्रिया के बाद विशेष ब्रेस पहनाया जाता है। समय पर उपचार से अधिकांश मामलों में बड़े ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती।

पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि क्योर इंडिया निर्धन परिवारों के बच्चों को विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने का सराहनीय कार्य कर रही है। यह प्रशिक्षण पीजी छात्रों को व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाएगा।

क्योर इंडिया के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मैथ्यू वर्गीज ने बताया कि संस्था ने 2009 में क्लबफुट से किसी बच्चे को दिव्यांग न रहने देने के संकल्प के साथ काम शुरू किया था। दिसंबर 2024 तक 29 राज्यों के 262 जिलों में 441 साप्ताहिक क्लीनिकों के जरिए 1.12 लाख से अधिक बच्चों का निःशुल्क उपचार किया जा चुका है। संस्था करीब नौ हजार डॉक्टरों को प्रशिक्षित कर चुकी है और 4.24 लाख से अधिक विशेष ब्रेस वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि देश में रोजाना करीब 150 बच्चे क्लबफुट के साथ जन्म लेते हैं, इसलिए हर जिले में क्लीनिक उपलब्ध कराना जरूरी है।

आयोजन सचिव डॉ. जितेंद्र वधवानी ने बताया कि पीजीआईएमएस में सोमवार, बुधवार और शनिवार को क्लबफुट बच्चों के प्लास्टर लगाए जाते हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. उमेश यादव ने किया।