गीता जीवन की चुनौतियों में सही दिशा दिखाने वाला ज्ञानः ज्ञानानंद महाराज

विद्यार्थियों को वर्तमान में जीने, कर्म को ताकत बनाने और मानवीय बनने के लिए प्रेरित किया।

गीता जीवन की चुनौतियों में सही दिशा दिखाने वाला ज्ञानः ज्ञानानंद महाराज

रोहतक, गिरीश सैनी। गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों में सही दिशा दिखाने वाला व्यावहारिक ज्ञान है। यह कर्म, कर्तव्य, आत्मसंयम, विवेक और संतुलन के माध्यम से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी सही मार्ग चुनना सिखाती है। यह बात गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने एमडीयू में आयोजित गीता संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कही।

एमडीयू के छात्र कल्याण विभाग एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र द्वारा राधाकृष्णन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में ज्ञानानंद महाराज ने गीता के संदेश को विद्यार्थी जीवन से जोड़ते हुए कहा कि पढ़ाई, करियर और भविष्य की चिंता के बीच युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ओवरथिंकिंग अतीत और भविष्य को लेकर होती है, जबकि जीवन वर्तमान में है। इसलिए विद्यार्थियों को वर्तमान में रहकर अपने कर्तव्यों और लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उन्होंने गीता के कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग की व्यावहारिक व्याख्या करते हुए कहा कि कर्मयोग व्यक्ति को पुरुषार्थ की प्रेरणा देता है, भक्तियोग मन को मजबूत और आत्मविश्वासी बनाता है, जबकि ज्ञानयोग बुद्धि और विवेक को जागृत करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से भाग्य को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि कर्म और पुरुषार्थ को अपनी ताकत बनाने का आह्वान किया।

ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि ऊर्जावान, विवेकशील, आत्मविश्वासी और मानवीय व्यक्तित्व का निर्माण करना है। अच्छे विचार और श्रेष्ठ आचरण ही व्यक्ति को वास्तविक सम्मान दिलाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, बड़ों की सेवा करने और स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाने के तीन संकल्प भी दिलाए।

नेत्र चिकित्सक एवं प्रेरक वक्ता डॉ. मार्कण्डेय आहूजा ने कहा कि गीता व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने, विचारों में सकारात्मकता लाने और मानसिक विकास में सहायक है। भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेंद्र कुमार ने स्वागत भाषण दिया, जबकि कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने आभार व्यक्त किया।

इस दौरान पूर्व मेयर मनमोहन गोयल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. रणदीप राणा, डीन सीडीसी प्रो. राजेश पुनिया, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग, सहित विवि के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी, शोधार्थी, विद्यार्थी और शहर के प्रबुद्धजन मौजूद रहे।