किसी की बात सुनना भी है मदद, बच सकती है जिंदगी
एमडीयू में विशेषज्ञों ने सिखाए आत्महत्या रोकथाम के तरीके।
रोहतक, गिरीश सैनी। किसी परेशान व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना, संवेदनशीलता से संवाद करना और संकट के समय उसका साथ देना आत्महत्या रोकथाम की दिशा में अहम कदम हो सकता है। इसी संदेश के साथ एमडीयू के मनोविज्ञान विभाग ने - छोटा कदम, बड़ा बदलाव विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला में करीब 150 विद्यार्थियों ने भाग लिया और आत्महत्या के जोखिम कारकों, चेतावनी संकेतों तथा बचाव के उपायों की जानकारी हासिल की।
पहले सत्र में पीजीआईएमएस, रोहतक के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ आर्य ने आत्महत्या के पीछे जिम्मेदार विभिन्न कारकों, चेतावनी संकेतों और संकटग्रस्त व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने आत्महत्या से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को भी दूर किया। उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में व्यक्ति को अकेला न छोड़ना और संवेदनशीलता के साथ उसकी बात सुनना बेहद जरूरी है।
दूसरे सत्र में जीजेयू, हिसार के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार ने नशे और आत्महत्या के बीच संबंध तथा प्रभावी संवाद की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आत्महत्या रोकथाम केवल विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, मित्र और समाज भी संवेदनशील व्यवहार के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बिना जज किए किसी की बात सुनना और जरूरत पड़ने पर मदद के लिए आगे आना प्रभावी कदम हैं।
कार्यशाला निदेशक प्रो. शालिनी सिंह ने कहा कि आत्महत्या रोकथाम की शुरुआत हमेशा किसी बड़े प्रयास से नहीं होती। किसी की परेशानी समझना और जरूरत के समय उसके साथ खड़ा होना भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
कार्यशाला संयोजक डॉ. शशि रश्मि और डॉ. बिंदु ने वक्ताओं का परिचय कराया। समन्वयक प्रो. सर्वदीप कोहली ने आभार जताया।

Girish Saini 

