कर्मों का फल कर्ता को खोज लेता हैः स्वामी सच्चिदानंद
रोहतक, गिरीश सैनी। आर्य पारिवारिक सत्संग सभा के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय चतुर्वेद शतकम विशिष्ट यज्ञ का रविवार को समापन हुआ। राजस्थान से आए मुख्य वक्ता स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि जैसे हजारों गायों में बछड़ा अपनी मां को पहचान लेता है, वैसे ही कर्म अपने कर्ता को खोज लेते हैं। सृष्टि की विविधता का कारण कर्मों की भिन्नता है। ईश्वर कर्मों के अनुसार सुख-दुःख प्रदान करते हैं और धर्म के पालन से सुख मिलता है।
यज्ञ ब्रह्मा आचार्य शक्तिदेव ने सामवेद एवं अथर्ववेद के मंत्रों से यज्ञ संपन्न करवाया। उन्होंने अग्निहोत्र को शारीरिक पुष्टि और दीर्घायु के लिए जीवनपर्यंत करने की प्रेरणा दी। भजन उपदेशक पं. राजेश ने भजनों से ईश्वर भक्ति का संदेश दिया। मंच संचालन सचिन ने किया। सभा द्वारा अतिथियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रधान पवनजीत आर्य सहित अन्य गणमान्य जन मौजूद रहे।

Girish Saini

