ऊँचाई से ज़्यादा ज़रूरी है उड़ान

ऊँचाई से ज़्यादा ज़रूरी है उड़ान

ऊँचाई कभी अचानक नहीं मिलती, लेकिन उड़ान हमेशा एक छोटे से विश्वास से शुरू होती है। हर व्यक्ति के भीतर कुछ कर गुजरने की क्षमता होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई परिस्थितियों को अपनी सीमा मान लेता है और कोई उन्हीं परिस्थितियों को अपनी ताकत बना लेता है। सफलता का अर्थ केवल आगे बढ़ना नहीं है। असली सफलता तब महसूस होती है, जब हमारी प्रगति के साथ किसी और के जीवन में भी उम्मीद, आत्मविश्वास और संभावनाओं के दरवाज़े खुलें। रास्ते में चुनौतियाँ आएँगी, असफलताएँ मिलेंगी, कभी फैसले गलत भी हो सकते हैं। लेकिन रुक जाना समाधान नहीं है। हर ठोकर अपने भीतर एक सीख लेकर आती है और हर कठिन दौर हमें पहले से अधिक मजबूत बनाकर जाता है।इसलिए अपने सपनों को छोटा मत कीजिए।अपने प्रयासों को परिस्थितियों के हवाले मत कीजिए। और सबसे बढ़कर—अपने भीतर के विश्वास को कभी कमजोर मत पड़ने दीजिए। क्योंकि मंज़िल तक पहुँचने वालों और रास्ते में लौट जाने वालों के बीच अक्सर फर्क केवल इतना होता है—
एक ने मुश्किलों के बावजूद कदम बढ़ाए,
दूसरे ने मुश्किलों को देखकर कदम रोक दिए। 

इसलिए चलते रहिए। सीखते रहिए। बढ़ते रहिए।
आपकी अगली उड़ान शायद आपकी कल्पना से भी ऊँची हो।

सोनिया बेरी 
शिक्षाविद्