भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है आपातकालः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान
वीर शिरोमणि बाबा बंदा सिंह बहादुर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसने संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है, ताकि युवा लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को समझ सकें। ये विचार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने महान योद्धा एवं वीरता, त्याग व राष्ट्रभक्ति के प्रतीक बाबा बंदा सिंह बहादुर के शहीदी दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।
निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा दौर था, जिसमें अनेक विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाए गए तथा नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि युवा पीढ़ी इस इतिहास को जाने, उससे सीख ले और संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति सदैव सजग रहे।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि इंटर्नशिप केवल शैक्षणिक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज को समझने, जनसेवा की भावना विकसित करने और व्यवहारिक अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान, अनुशासन और नवाचार के माध्यम से समाज तथा राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान देना चाहिए।
इंटर्नशिप प्रभारी डॉ. वजीर सिंह ने प्रतिभागियों को संस्थान की कार्यप्रणाली, इंटर्नशिप की रूपरेखा एवं विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थान में विद्यार्थियों को ग्रामीण विकास से जुड़े विविध विषयों पर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। इस दौरान एचआईआरडी से सुशील मेहता व संदीप कुमार, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, हैदराबाद से गुरबिंदर सिंह, इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थी तथा संस्थान के अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
Girish Saini 


