वन मंडल अधिकारी ने सभी विभागों से मानसून में पौधारोपण करने का आह्वान किया
वन मंडल अधिकारी सुंदर लाल सांभरिया ने जिला के सभी विभागाध्यक्षों का आह्वान किया है कि मानसून के अनुकूल मौसम का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने अधिकार क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पौधरोपण करें। इसके लिए निकटतम वन विभाग की नर्सरी से आवश्यक पौधे प्राप्त करें।
रोहतक, गिरीश सैनी। वन मंडल अधिकारी सुंदर लाल सांभरिया ने जिला के सभी विभागाध्यक्षों का आह्वान किया है कि मानसून के अनुकूल मौसम का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने अधिकार क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पौधरोपण करें। इसके लिए निकटतम वन विभाग की नर्सरी से आवश्यक पौधे प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि जिला में हरित आवरण बढ़ाने और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकारी कार्यालय परिसरों, संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, पार्कों, खाली सरकारी भूमि तथा अन्य उपयुक्त स्थानों पर योजनाबद्ध ढंग से पौधरोपण करें। सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी से रोहतक जिला के हरित आवरण में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भारत सरकार की मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) पहल के उद्देश्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
वन मंडल अधिकारी ने बताया कि वन विभाग द्वारा वर्तमान पौधारोपण सीजन के लिए अपनी नर्सरियों में पर्याप्त संख्या में स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार किए गए हैं, जिनमें विभिन्न देशी, सजावटी, सडक़ किनारे लगाए जाने वाले, औषधीय तथा छायादार प्रजातियों के पौधे शामिल हैं। सभी विभागाध्यक्ष अपने क्षेत्र में पौधारोपण के लिए उपलब्ध वास्तविक स्थानों का आकलन कर पौधों की आवश्यकता निर्धारित करें और समय रहते निकटतम वन विभाग की नर्सरी से आवश्यक पौधे प्राप्त करें।
उन्होंने बताया कि सरकारी विभाग सुनारिया वन नर्सरी, बोहर वन नर्सरी, सांघी वन नर्सरी, सांपला वन नर्सरी, समर गोपालपुर हर्बल पार्क नर्सरी, बैंसी वन नर्सरी तथा महम वन नर्सरी से आवश्यकता अनुसार पौधे प्राप्त कर सकते हैं। वन विभाग के संबंधित रेंज अधिकारी एवं वन कर्मचारी पौधों की प्रजाति के चयन, पौधारोपण की उचित तकनीक और पौधों की देखभाल के संबंध में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करवाएंगे।
उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल ऐसे उपयुक्त स्थानों पर किया जाए, जहां पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और नियमित रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था हो। पौधारोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और रखरखाव करें। किसी कारण से पौधा नष्ट होने की स्थिति में उसके स्थान पर नया पौधा लगाया जाए, ताकि पौधों की अधिकतम जीवित रहने की दर हासिल की जा सके।
Girish Saini 


