जनता की आत्मा है संविधानः कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया

अंबेडकर जयंती पर कार्यक्रम में ली गई संविधान शपथ।

जनता की आत्मा है संविधानः कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जातिवाद मुक्त समाज की परिकल्पना की और भारतीय संविधान को उसी विचारधारा के आधार पर गढ़ा। उन्होंने हर वर्ग और हर व्यक्ति को समान अवसर देने का अधिकार सुनिश्चित किया, जिससे भारत का संविधान विश्व के श्रेष्ठतम संविधानों में शामिल हुआ। कुलपति ने संविधान को जनता की आत्मा बताते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की असली शुरुआत कक्षा से होती है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर विधि विभाग एवं डॉ अंबेडकर चेयर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में कुलपति प्रो. पुनिया ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में डॉ. अंबेडकर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। शिक्षकों और विद्यार्थियों को चाहिए कि वे उनके सिद्धांतों को केवल पढ़ें ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में भी उतारें।

कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने शिक्षा और समानता को समाज के विकास का आधार बनाया और उनके विचार आज भी समाज को दिशा दे रहे हैं। विधि विभागाध्यक्षा प्रो. सोनू ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम का संचालन किया। डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग ने कार्यक्रम का संयोजन किया।

इस दौरान डॉ. अंबेडकर के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग भी की गयी और कुलपति ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उपस्थित जन ने डॉ. अंबेडकर के आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हुए संविधान सम्मान शपथ ली।