पीजीआईएमएस की रणबीर सिंह ओपीडी में अब मिलेगी सीपीआर ट्रेनिंग

पीजीआईएमएस की रणबीर सिंह ओपीडी में अब मिलेगी सीपीआर ट्रेनिंग

रोहतक, गिरीश सैनी। पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के पीजीआईएमएस में अब मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को भी जीवन बचाने की ट्रेनिंग मिलेगी। चौ. रणबीर सिंह ओपीडी ब्लॉक में जल्द ही एक अत्याधुनिक सीपीआर कियोस्क लगाया जाएगा।

पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने ये जानकारी देते हुए बताया कि ये प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ भारत और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निरोगी हरियाणा अभियान का हिस्सा है।

निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि अस्पताल में हर रोज हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के केस आते हैं। कई बार मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही गोल्डन ऑवर निकल जाता है। अगर आसपास मौजूद व्यक्ति को सीपीआर आता हो तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस ओपीडी में रोजाना 8 से 10 हजार लोग आते हैं। अगर ये लोग सीपीआर सीख कर जाएंगे तो रोहतक ही नहीं, पूरे हरियाणा में कार्डियक अरेस्ट से होने वाली मौतों की दर में कमी आएगी।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि सीपीआर कियोस्क ओपीडी के भूतल पर मेन एंट्री के पास लगाया जाएगा, ताकि हर मरीज की नजर पड़े। एक प्रशिक्षित हेल्थ केयर वर्कर सुबह से ओपीडी खत्म होने तक कियोस्क पर मौजूद रहेगा और ओपीडी में आने वाले हर मरीज व तीमारदार को हैंड्स-ओनली सीपीआर सिखाएगा। इससे लोग खुद प्रैक्टिस कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि रोजाना कम से कम 500 लोगों को सीपीआर ट्रेनिंग दी जाए।

डॉ. कुंदन मित्तल ने कहा कि इस सीपीआर कियोस्क को शुरू करने में कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल का अहम सहयोग व मार्गदर्शन रहा है। कुलपति डॉ. अग्रवाल का मानना है कि अस्पताल सिर्फ इलाज की जगह नहीं, स्वास्थ्य शिक्षा का मंदिर होना चाहिए।

कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। ऐसे में दिमाग तक खून नहीं पहुंचता और 3-4 मिनट में मरीज की मौत हो सकती है। सीपीआर यानी कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन में छाती के बीच में 1 मिनट में 100-120 बार जोर से दबाया जाता है। इससे दिल का पंपिंग फंक्शन मैनुअली चलता है और मरीज को अस्पताल पहुंचने तक का समय मिल जाता है।