तकनीक, शिक्षा और नवाचार ही बेरोजगारी से लड़ने के सबसे बड़े औजारः कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ

दृश्य कला विभाग का 36वां स्थापना दिवस समारेह।

तकनीक, शिक्षा और नवाचार ही बेरोजगारी से लड़ने के सबसे बड़े औजारः कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ

रोहतक, गिरीश सैनी। तकनीक, शिक्षा और नवाचार ही बेरोजगारी से लड़ने के सबसे बड़े औजार हैं। एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने यह बात दृश्य कला विभाग के 36वें स्थापना दिवस समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने इस दौरान आर्ट गैलरी का अवलोकन भी किया।

कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने कहा कि एक सफल कलाकार के लिए क्रिएटिविटी, इमेजिनेशन और डिजाइन सबसे जरूरी हैं। कलाकार को केवल चित्र नहीं बनाने चाहिए, बल्कि भूत, वर्तमान और भविष्य की समझ के साथ समाज की नब्ज पहचानते हुए उसकी संवेदनाओं को कैनवास पर उतारना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए विश्व विख्यात चित्रकार विन्सेंट वैन गॉग और उनके भाई थियो वैन गॉग के संघर्ष और समर्पण का उदाहरण दिया। उन्होंने यूरोप के प्रसिद्ध प्रभाववादी चित्रकार गुस्ताव कैलेबोट और कामी पिसारो का भी उल्लेख किया, जिन्होंने पेरिस के बदलते शहरी जीवन और आधुनिक परिवेश को अपनी चित्रकला के माध्यम से नई पहचान दी। 

इससे पहले विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि दृश्य कला विभाग की स्थापना 31 जुलाई 1990 को हुई थी। उन्होंने विभाग की 36 वर्षों की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। डॉ. सुनीता मलिक ने अपने पिता एवं विभाग के संस्थापक शिक्षकों में शामिल डॉ. राम मेहर मलिक के शिक्षा और कला के क्षेत्र में योगदान को याद किया। इस दौरान डॉ. अंजलि दुहन, डॉ. सदा राम, डॉ. राजेश सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।