पीजीआईएमएस, रोहतक में इनडोर मरीजों की टीबी स्क्रीनिंग शुरू

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बटन दबाकर किया पहला एआई एक्स-रे।

पीजीआईएमएस, रोहतक में इनडोर मरीजों की टीबी स्क्रीनिंग शुरू

रोहतक, गिरीश सैनी। भारत को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम के तहत पीजीआईएमएस, रोहतक में इनडोर मरीजों में ट्यूबरकुलोसिस स्क्रीनिंग कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से पहला एक्स-रे कर इस मुहिम की शुरुआत की।

वार्ड 9 से शुरू हुए इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि, कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की नियमित टीबी स्क्रीनिंग समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि भर्ती मरीजों में छिपी हुई टीबी को समय पर पकड़ लिया जाए तो संक्रमण की चेन वहीं टूट जाएगी।

कुलपति ने कहा कि यूएचएसआर का दायित्व सिर्फ इलाज देना नहीं, बल्कि रोग को जड़ से खत्म करने की दिशा में काम करना है। उन्होंने कहा कि टीबी का जल्दी पता लगाना आधा इलाज है। उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए अतिरिक्त संसाधन और मैनपावर उपलब्ध कराने की घोषणा भी की। संकाय सदस्यों से अपील करते हुए कुलपति ने कहा कि वे इस मुहिम को मिशन मोड में लेकर चलें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि संस्थान के प्रत्येक वार्ड में संदिग्ध टीबी मरीजों के लिए दो आइसोलेशन बेड अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएंगे। इससे संक्रमण नियंत्रण और मरीज सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। स्टेट टास्क फोर्स एनटीईपी के चेयरपर्सन डॉ. ध्रुव चौधरी ने कुलपति से आग्रह किया कि पीजीआईएमएस, रोहतक को टीबी के निदान, प्रबंधन और उन्मूलन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए। सिविल सर्जन डॉ. कमला वर्मा ने कहा कि जिला स्वास्थ्य विभाग पीजीआईएमएस के साथ टीबी के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगा।

एनटीईपी के नोडल अधिकारी डॉ. विपुल कुमार ने बताया कि हैंडहेल्ड एक्स-रे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित छाती एक्स-रे विश्लेषण से अब कुछ मिनटों में ही टीबी की आशंका पकड़ी जा सकती है। उन्होंने बताया कि मुहिम के पहले दिन 25 मरीजों के हैंडहेल्ड एक्स-रे किए गए। एआई आधारित विश्लेषण में 2 मरीजों के एक्स-रे असामान्य पाए गए, जिन्हें तुरंत आगे की जांच के लिए एनटीईपी से जोड़ा गया।

इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल, डॉ. पुष्पा दहिया, डॉ. ज्योत्सना, डॉ. अपर्णा परमार, डॉ. सुधीर अत्री, डॉ. प्रेम प्रकाश गुप्ता, डॉ. नीलम कुमार, डॉ. तराना गुप्ता, डॉ. संदीप गोयल, डॉ. संजय फोतेदार, डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. वरुण अरोड़ा, डॉ. अनुज जांगड़ा और जिला टीबी अधिकारी डॉ. विकास सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।