राजस्थान के प्राचीन लोक वाद्य यंत्र पर सुपवा के छात्रों ने बनाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म

कुलपति डॉ अमित आर्य ने दी शुभकामनाएं।

राजस्थान के प्राचीन लोक वाद्य यंत्र पर सुपवा के छात्रों ने बनाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा) के छात्रों द्वारा बनाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म रावण हत्था का पोस्टर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने जयपुर में लॉन्च किया। ये डॉक्यूमेंट्री फिल्म राजस्थान की प्राचीन लोक वाद्य परंपरा को लोगों के बीच फिर से जीवंत करती है। इसके निर्देशक एवं सुपवा के छात्र अरविंद चौधरी ने कुलपति डॉ अमित आर्य, कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक मनोचा सहित अन्य स्टाफ से भेंट की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

जयपुर स्थित जवाहर कला केंद्र में संस्कार भारती द्वारा आयोजित लोक कला संगम कार्यक्रम के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने रावण हत्था का पोस्टर लॉन्च किया। डीएलसी सुपवा के एफटीवी विभाग के छात्र रहे अरविंद चौधरी ने बताया कि राजस्थान की लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर द्वारा करवाया गया। इसके लिए शोध एवं निर्देशन स्वयं अरविंद ने किया, जबकि छायांकन रिदम तंवर, संपादन यश चोपड़ा, ध्वनि सज्जा तन्मय भुटानी, सह संपादक दिनेश कुमार, ध्वनि मुद्रक मोहित वत्स रहे, जो सभी डीएलसी सुपवा के ही छात्र हैं।

कुलपति डॉ अमित आर्य ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे छात्र फिल्म इंडस्ट्री में अच्छा कार्य कर रहे हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा सुपवा के छात्रों को डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रोजेक्ट देना इस बात का संकेत है कि यहां के छात्रों के काम विश्वसनीय है। इस दौरान एफटीवी के एफसी महेश टीपी, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ अजय कौशिक भी मौजूद रहे।

अरविंद चौधरी ने बताया कि रावण हत्था राजस्थान का अत्यंत प्राचीन लोक वाद्य यंत्र है, जिसे विशेष रूप से भोपा समाज के कलाकार बनाते हैं और साधना के साथ बजाते हैं। ये वाद्य यंत्र न केवल संगीत का माध्यम है, बल्कि लोक आस्था, परंपरा और इतिहास का जीवंत प्रतीक भी है। फिल्म का निर्माण लोक कला संस्कृति को विलुप्त होने से बचाने और नई पीढ़ी में इसके प्रति जागरूकता व गौरव की भावना जागृत करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने बताया कि अपनी टीम के साथ लगभग छह माह तक शोध कार्य किया और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर भोपा कलाकारों से संवाद स्थापित कर इस विरासत को कैमरे में सहेजा।