स्टार्टअप इनोवेशन व एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देगी सुपवाः कुलपति डॉ. अमित आर्य

क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जाएंगी अंतर-संस्थागत साझेदारी।

स्टार्टअप इनोवेशन व एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देगी सुपवाः कुलपति डॉ. अमित आर्य

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक द्वारा संस्थानिक स्टार्टअप इनोवेशन व एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दिया जाएगा। इस निर्णय के तहत क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत आंतरिक व अंतर संस्थागत साझेदारियां की जाएंगी, ताकि, छात्रों, संकाय व फैकेल्टी की नवाचारी और उद्यमिता क्षमता का और अधिक विकास किया जा सके। इस आशय का निर्णय विवि कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में लिया गया।

कुलपति डॉ अमित आर्य ने बताया कि केंद्र सरकार देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में कार्यरत है। इसके मद्देनजर छात्र-चालित नवाचार व स्टार्टअप को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छात्रों और संकाय को नवाचार व उद्यमिता गतिविधियों में शामिल करने के लिए सुपवा अपने स्तर पर प्लेटफॉर्म मुहैया कराएगी। इसके लिए एक मजबूत नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाया गया है। उन्होंने कहा कि संस्थानिक स्टार्टअप इनोवेशन व एंटरप्रेन्योरशिप पॉलिसी के तहत प्री-इंक्यूबेशन  व इंक्यूबेशन समर्थन प्रणालियां, नवाचार व स्टार्टअप में शामिल संकाय व छात्रों के लिए प्रोत्साहन, संस्थानों व इनक्यूबेटेड स्टार्टअप के बीच आईपी स्वामित्व, राजस्व साझा करने व इक्विटी साझा करने की प्रणालियां विकसित की जाएंगी।

कुलपति डॉ आर्य ने कहा कि छात्रों के पाठ्यक्रम के अनुसार ही नवाचार व उद्यमिता परियोजनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि उन्हें उद्यमिता कौशल व व्यावसायिक सूझबूझ विकसित करने में मदद मिल सके। छात्रों की रचनात्मक समस्या व समाधान क्षमता और उद्यमिता मानसिकता का उपयोग करने तथा इकोसिस्टम सक्षम करने व विभिन्न हिस्सेदारों के साथ क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत आंतरिक और अंतर-संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।

कुलपति ने कहा कि नवाचार और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को बनाने, सुव्यवस्थित करने और मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। ये पॉलिसी उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र छात्रों, संकाय व फैकल्टी की नवाचारी व उद्यमिता क्षमता को पहचानने, मार्गदर्शन देने, पोषित करने और उन्हें स्टार्टअप उद्यमियों में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके लिए वित्तपोषण, निवेश के अवसर व नेटवर्किंग का कार्य विवि द्वारा किया जाएगा।