मोटापा और बदलती जीवनशैली से बच्चियों में समय से पहले यौवन, 4 साल की बच्ची को भी आए पीरियड्स

मोटापा और बदलती जीवनशैली से बच्चियों में समय से पहले यौवन, 4 साल की बच्ची को भी आए पीरियड्स

रोहतक, गिरीश सैनी। मोटापा, असंतुलित खानपान और बदलती जीवनशैली का असर अब बच्चों के हार्मोनल स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। पीजीआईएमएस, रोहतक की पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी यूनिट में पिछले एक वर्ष के दौरान 8 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों में समय से पहले यौवनावस्था, पीरियड्स और थायराइड से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि यूनिट में 4 वर्ष की बच्ची में पीरियड्स शुरू होने तथा 9 वर्ष की उम्र में गंभीर थायराइड की समस्या का मामला भी सामने आया।

विशेषज्ञों के अनुसार लड़कियों में सामान्यतः यौवनावस्था 8 से 13 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होती है। इससे पहले स्तन विकास, शरीर पर बाल आना, अचानक लंबाई बढ़ना, तैलीय त्वचा, शरीर से वयस्कों जैसी गंध, मूड में बदलाव या कम उम्र में पीरियड्स शुरू होना प्रीकोशियस प्यूबर्टी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

शिशु रोग विभाग की प्रो. अंजलि वर्मा ने बताया कि बच्चों में बढ़ता मोटापा, जंक फूड, अधिक चीनी और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। अत्यधिक मोबाइल, टीवी और गेमिंग भी बच्चों की जीवनशैली को प्रभावित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों ने अभिभावकों को घर का पौष्टिक भोजन देने, जंक फूड और मीठे पेय सीमित करने, स्क्रीन टाइम कम करने तथा बच्चों को नियमित खेलकूद के लिए प्रेरित करने की सलाह दी। बच्चे के वजन और लंबाई में तेजी से बदलाव होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए पौष्टिक आहार, सीमित स्क्रीन टाइम और नियमित शारीरिक गतिविधि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। समय पर पहचान और उपचार से बच्चियों के स्वास्थ्य एवं भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है।

जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ. मंजुनाथ बी.सी. ने कहा कि 8 वर्ष से पहले असामान्य लक्षण दिखने पर बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से तुरंत सलाह लें।