समाज को सशक्त व सुरक्षित रखने के लिए सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत रखना जरूरीः सीएम नायब सिंह सैनी

मुख्यमंत्री ने साहित्यकार सम्मान समारोह में 81 साहित्यकारों को किया सम्मानित।

समाज को सशक्त व सुरक्षित रखने के लिए सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत रखना जरूरीः सीएम नायब सिंह सैनी

रोहतक, गिरीश सैनी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास व्यक्त किया है कि दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले कलाकार व शोधकर्ता तैयार करेगी। मुख्यमंत्री वीरवार को सूर्य कवि दादा लख्मीचंद की 123वीं जयंती के उपलक्ष्य में डीएलसी सुपवा में आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

डीएलसी सुपवा द्वारा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विवि परिसर पहुंचने पर सबसे पहले सूर्य कवि दादा लख्मीचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और पौधरोपण किया। इसके बाद उन्होंने डिजाइन व विजुअल आर्ट्स डिपार्टमेंट के छात्रों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में छात्रों ने अलग-अलग तरह के परिधान, स्कल्प्चर, एनीमेशन, पेंटिंग और एप्लाइड आर्ट के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति, कलात्मक सोच व प्रतिभा दर्शाती कलाकृतियां प्रदर्शित की थी। मुख्यमंत्री ने छात्रों से कलाकृतियों के बारे में जानकारी ली और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने हरियाणा साहित्य व संस्कृति अकादमी द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर साहित्यकार सम्मान समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् व विवि कुलगीत के साथ हुई। कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक मनोचा ने स्वागत संबोधन किया। सूर्य कवि दादा लख्मी चंद को श्रद्धांजलि देते हुए उनके पड़ पौत्र व सुपवा के पूर्व छात्र चेतन कौशिक और छात्र योगेश वत्स ने उनकी लिखी रागनी प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विभिन्न 40 श्रेणियों में कुल 81 साहित्यकारों को प्रमाण-पत्र, स्मृति चिन्ह एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। इनमें मुख्य रूप से महेंद्रगढ़ के रोहित यादव को वर्ष 2021 तथा विनोद बब्बर को आजीवन साहित्य साधना पुरस्कार से नवाजा गया। वर्ष 2021 के लिए वीएम बेचैन व वर्ष 2022 के लिए डॉ. राजकला देशवाल को पं. लखमी चंद सम्मान प्रदान किया गया। कुलपति डॉ. अमित आर्य ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को विवि के छात्रों द्वारा तैयार किया गया उनका पोर्ट्रेट भेंट किया।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूर्य कवि पंडित लख्मी चंद केवल एक कवि नहीं, बल्कि हरियाणा की आत्मा व लोक संस्कृति के सशक्त प्रहरी थे। उनकी स्मृति में आयोजित इस समारोह में उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि जिस समाज का साहित्य जीवित रहता है, उसकी संस्कृति कभी समाप्त नहीं होती। सांस्कृतिक जड़ों को जितना मजबूत रखा जाएगा, समाज उतना ही सशक्त व सुरक्षित रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों या आर्थिक प्रगति से नहीं होती, बल्कि उसकी वास्तविक पहचान उसकी भाषा, साहित्य, संस्कृति व  कलाकारों से होती है। सत्ता समय के साथ बदल सकती है, लेकिन संस्कृति पीढ़ियों को जोड़ने का कार्य करती है। जो समाज अपनी साहित्यिक व सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है, वही आने वाली पीढ़ियों के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समारोह केवल पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकचेतना, सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपरा का उत्सव है।

उन्होंने कहा कि दादा लख्मी चंद को केवल कवि या कलाकार कहना उनके विराट व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। वह लोकजीवन की आत्मा के स्वर थे। उन्होंने अपनी रागनियों व सांगों के माध्यम से सत्य, त्याग, निष्ठा, धर्म, नैतिकता तथा मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि आज देश डिजिटल क्रांति के दौर से गुजर रहा है। आधुनिकता को अपनाना आवश्यक है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य, भाषा, लोककलाओं व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल साहित्यकारों और कलाकारों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोहतक स्थित विवि का नाम पं. लख्मी चंद के नाम पर रखा गया है। यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प है। उन्होंने विश्वास जताया कि विवि भविष्य में ऐसे साहित्यकार, कलाकार व शोधकर्ता तैयार करेगी, जो हरियाणा की लोकपरंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने साहित्य के क्षेत्र में नए सम्मानों की स्थापना का भी निर्णय लिया है।

कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने मंच से पं. लख्मी चंद की रागिनी गाकर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि पं. लख्मी चंद ने अपने मात्र 42 वर्ष के जीवन में अपनी रागनियों में जो बातें कही थी, आज वह साकार होती दिखाई देती हैं। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि अकादमी दादा लख्मी चंद के नाम से प्रदेश का प्रतिष्ठित साहित्य सम्मान प्रदान करती है, इसलिए इस वर्ष यह निर्णय लिया गया कि सम्मान समारोह का आयोजन उनके नाम से संचालित विवि में किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की साहित्यकार अभिनंदन योजना के तहत साहित्यकारों व विद्वानों को सम्मानित किया गया। अलग-अलग वर्ष के लिए विभिन्न श्रेणियों में हिंदी, हरियाणवी, संस्कृत, पंजाबी व उर्दू भाषा के साहित्यकार और विद्वान ने सम्मान प्राप्त किया। हिंदी व हरियाणवी भाषा में कुल 32, संस्कृत भाषा में 11 विद्वानों और पंजाबी भाषा में 31 साहित्यकारों तथा उर्दू भाषा में 7 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।

इस दौरान सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, सीएम के ओएसडी वीरेंद्र बड़खालसा, शिक्षाविद् सीताराम व्यास, समाजसेवी सुभाष आहूजा, रविंद्र सक्सेना, राजेश जैन, सीआरएसयू जींद के कुलपति प्रो. रामपाल सैनी, सीबीएलयू भिवानी की कुलपति दीप्ति धर्माणी सहित अन्य गणमान्य जन व साहित्य प्रेमी व विवि के स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।