संगीत में गायन और साहित्य में संपादन: रीटा खड्याल

संगीत में गायन और साहित्य में संपादन: रीटा खड्याल
रीटा खड्याल।

-कमलेश भारतीय 
मैं संगीत के क्षेत्र में शास्त्रीय गायन करती हूं लेकिन मेरा रास्ता बदल गया और मैं साहित्य का संपादन करने लगी । सन् 2018 से पिछले पचास साल से ऊपर प्रकाशित हो रही जम्मू कश्मीर अकेडमी ऑफ आर्ट, कल्चर एंड व लेंग्वेजिज की द्वैमासिक हिंदी पत्रिका शीराजा का संपादन कर रही हूं । यह कहना है रीटा खड्याल का जो शास्त्रीय गायन में एम ए में गोल्ड मेडलिस्ट हैं और आकाशवाणी की एप्रूव गायिका भी ।  हिंदी , डोगरी और अन्य भाषाओं में गायन करती हैं । 
मूल रूप से जम्मू के निकट गांव राया सुचानी की निवासी रीटा ने प्रारम्भिक शिक्षा वहीं से की और ग्रेजुएशन जम्मू के गांधी नगर के महिला काॅलेज से । जम्मू विश्विद्यालय से एम ए डोगरी और शास्त्रीय गायन में भी एम ए, बीएड भी ।

 

-स्कूल काॅलेज यूनिवर्सिटी में क्या शौक रहे ?
-मेरा पैशन रहा और है संगीत । उसमें भी शास्त्रीय गायन । स्कूल काॅलेज में अनेक पुरस्कार मिले ।
-जाॅब कहां ?
-सन् 2007 में जम्मू कश्मीर अकेडमी ऑफ आर्ट एंड लेंग्वेजिज में रिसर्च एसिस्टेंट के रूप में नियुक्त हुई और डिक्शनरी विभाग में काम किया और सन् 2013 में सहायक संपादक और फिर सन् 2018 से शीराजा की संपादक का कार्यभार मिला । इस तरह संगीत की दुनिया से साहित्य की दुनिया में आ गयी ।
-संगीत में जाने की प्रेरणा कौन ?
-मेरी मां जिनका नाम संयोग से वैष्णो देवी ही है । वे खूब अच्छा कंठ पाये हुए थीं और मधुर गाती थीं । मैंने शास्त्रीय संगीत सीखा पृथ्वीराज रैना जी से ।
-पसंदीदा गायिका ?
-लता मंगेशकर जी । उन्हीं की तरह बचपन से गाने की कोशिश रही मेरी । 
-कोई ऑडियो/वीडियो ?
-दो ऑडियो आए हैं । 
-पुरस्कार ?
- जम्मू के कटरा में हर नवरात्र पर जम्मू कश्मीर  टूरिज्म एंड श्राइन बोर्ड द्वारा  आयोजित भक्ति संगीत प्रतियोगिता में सन् 2005 में विजेता रही और एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला । बाद में दिल्ली में वीनस कम्पनी ने इसकी रिकार्डिंग भी की । इसके बाद अनेक संस्थाओं ने सम्मानित किया । इसी प्रकार रेडियो पर डोगरी में गाया मेरा गाना प्रथम रहा और एक माह तक हर आकाशवाणी केंद्र पर प्रसारित किया गया । 
-पति और बच्चे ?
-पति डाॅ पद्म देव सिंह जम्मू विश्विद्यालय में डोगरी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं और मेरे दो बेटे हैं - मल्हार और सारंग । मल्हार सोलह साल का तो सारंग दस साल का ।
-जम्मू कश्मीर के हिंदी लेखकों में कौन कौन उल्लेखनीय हैं ?
-ओम गोस्वामी, नीरू शर्मा, छत्रपाल, महाराज कृष्ण संतोषी , अग्निशेखर , प्रो राजकुमार, वीणा मुदकी, उषा व्यास ,  डाॅ आदर्श, प्रो चंचल डोगरा , अरुणा शर्मा, नरेश कुमार उदास, निर्मल विनोद व मनोज शर्मा आदि । असल में मैं भी हिंदी साहित्य की छात्रा बन गयी हूं । जो निरंतर लिख रहे हैं उनके बारे में जान रही हूं । नीरू शर्मा और छत्रपाल नहीं रहे और उषा जी मुम्बई बेटी के पास शिफ्ट हो गयी हैं । ओम गोस्वामी व उषा व्यास भी शीराजा के संपादक रहे हैं ।
-लक्ष्य?
-बहुत संतोषी जीव हूं । जो जो मिलता है उसी में खुश । संगीत की दुनिया से साहित्य में पहुंच गयी ।  आगे कहां, क्या मिलेगा नहीं जानती । पर जो काम मिला है उसे पूरी निष्ठा से करूंगी और करती रहूंगी ।
हमारी शुभकामनाएं रीटा खडयाल को ।