शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का दो दिवसीय प्रांतीय अभ्यास वर्ग संपन्न

विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण का माध्यम बने शिक्षाः प्रो. विनोद कुमार

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का दो दिवसीय प्रांतीय अभ्यास वर्ग संपन्न

रोहतक, गिरीश सैनी। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, हरियाणा द्वारा बाबा मस्तनाथ विवि, अस्थल बोहर में आयोजित दो दिवसीय प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला एवं कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग रविवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा की दृष्टिः समग्र विकास विषय पर शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, युवा शक्ति और विकसित भारत-2047 को लेकर विमर्श हुआ।

समापन सत्र में बीएमयू के कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री अथवा रोजगार तक सीमित रखना नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व, चरित्र, संस्कार और राष्ट्रबोध के निर्माण का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि आज के बदलते तकनीकी युग में विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता प्रदान करना आवश्यक है, लेकिन उन्हें भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और अपनी गौरवशाली ज्ञान परंपरा से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा हमेशा से सा विद्या या विमुक्तये के भाव पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास से पूरा नहीं होगा। इसके लिए ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जिनमें ज्ञान के साथ चरित्र, अनुशासन, राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता हो।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सह-संयोजक संजय स्वामी ने शिक्षा में भारतीय दृष्टिकोण, युवा पीढ़ी की भूमिका तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को लेकर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. नवीन (डीन एकेडमिक अफेयर्स, बीएमयू) ने की। प्रांत अध्यक्ष प्रो. सतहंस ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान प्रांत संयोजक डॉ. देवी भूषण शर्मा, प्रांत सह-संयोजक मनोज कौशिक तथा प्रांत संरक्षक डॉ. गजराज सहित अन्य पदाधिकारी व गणमान्य जन मौजूद रहे।