डॉ. अंबेडकर की विचारधारा और विकसित भारत के लिए नशा मुक्ति का महत्व विषय पर विचार संगोष्ठी

डॉ. अंबेडकर की विचारधारा और विकसित भारत के लिए नशा मुक्ति का महत्व विषय पर विचार संगोष्ठी

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के संस्कृत, पालि एवं प्राकृत विभाग में डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा और विकसित भारत के लिए नशा मुक्ति का महत्व विषय पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्कृत विभाग एवं शोध व नशा मुक्ति चेतना समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने नशामुक्त समाज के निर्माण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

बतौर मुख्य अतिथि, पीजीआईएमएस, रोहतक के इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि आज नशा समाज की जड़ों को कमजोर कर रहा है। नशा केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और मानसिक संतुलन को भी बर्बाद करता है। उन्होंने चिंता जताई कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग भी अब डिजिटल नशे का रूप ले चुका है, जिससे युवा पीढ़ी सबसे अधिक प्रभावित हो रही है।

बतौर मुख्य वक्ता, स्टेट ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर, पीजीआईएमएस, रोहतक के डॉ. विनय ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा, जब देश नशा मुक्त होगा। डॉ. अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति उसके नागरिकों के चरित्र और नैतिक मूल्यों पर आधारित होती है, जिसे नशा पूरी तरह नष्ट कर देता है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की महानगर संपर्क प्रमुख डॉ. सोनिका ने कहा कि बाबा साहेब का संविधान देश को एकता, समानता और अधिकारों की मजबूत नींव प्रदान करता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीभगवान ने की। कार्यक्रम संचालन एबीवीपी के प्रांत शोध संयोजक सुमित ने किया। डॉ. सुषमा नारा ने आभार व्यक्त किया।