एएमआर की चुनौती के बीच प्रोटीन एंटीबायोटिक्स पर नई राह तलाश रहे वैज्ञानिक

एमडीयू में व्याख्यान आयोजित।

एएमआर की चुनौती के बीच प्रोटीन एंटीबायोटिक्स पर नई राह तलाश रहे वैज्ञानिक

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के बायोकैमिस्ट्री विभाग में प्रोटीन एंटीबायोटिक्सः नेक्स्ट-जेनरेशन डिफेंडर्स अगेंस्ट एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस विषय पर आयोजित व्याख्यान में एम्स, नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप शर्मा ने विद्यार्थियों को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) की बढ़ती चुनौती और इससे निपटने की आधुनिक वैज्ञानिक रणनीतियों से अवगत कराया। विभागाध्यक्ष प्रो. नर सिंह चौहान ने वक्ता का स्वागत किया।

डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ने से सामान्य संक्रमणों का उपचार भी कठिन और महंगा होता जा रहा है। एएमआर अस्पतालों के साथ-साथ समुदायों के लिए भी गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। उन्होंने एंटीमाइक्रोबियल प्रोटीन और पेप्टाइड्स को भविष्य की उपचार पद्धतियों की अहम संभावना बताते हुए कहा कि ये बैक्टीरिया पर अलग-अलग तंत्रों से प्रभाव डाल सकते हैं।

उन्होंने एंटीबायोटिक्स के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा दवाओं की प्रभावशीलता बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को डायग्नोस्टिक्स, क्लिनिकल रिसर्च, फार्मा-बायोटेक, ड्रग डिस्कवरी, जीनोमिक्स, पब्लिक हेल्थ और फोरेंसिक साइंस में करियर के अवसरों की जानकारी भी दी।

इस दौरान फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज के पीजी विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक मौजूद रहे। अंत में प्रो. नर सिंह चौहान ने आभार व्यक्त किया।