स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 में रोहतक बना सर्वश्रेष्ठ जिला

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने एडीसी व संबंधित स्टाफ के कार्यों की सराहना की।

स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 में रोहतक बना सर्वश्रेष्ठ जिला

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी)-2025 में रोहतक को उत्तर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला घोषित होने पर अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार, संबंधित विभाग, स्वयं सहायता समूह, ग्रामीणों के योगदान की सराहना की है। उन्होंने विकास एवं पंचायत विभाग के साथ-साथ जिला की सभी ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया है।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने इस उपलब्धि को जिला एवं प्रदेश दोनों के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा है कि यह सम्मान प्रत्येक ग्राम पंचायत, स्वच्छता कर्मी, अग्रिम पंक्ति के अधिकारी, स्वयं सहायता समूह, स्वयंसेवक एवं ग्रामीण परिवार का है, जिन्होंने स्वच्छता को केवल अभियान नहीं बल्कि अपनी दैनिक जीवनशैली बनाया। यह उपलब्धि सामूहिक प्रयास, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा सतत फील्ड मॉनिटरिंग की सफलता का प्रमाण है। रोहतक का अनुभव ग्रामीण स्वच्छता को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए पूरे क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करेगा।

उपायुक्त ने कहा कि हरियाणा प्रदेश ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी)-2025 में उत्तर भारत में प्रथम स्थान प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रोहतक जिला को उत्तर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला घोषित किया गया है, जो सभी जिला वासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने नागरिकों का आह्वान किया है कि वे इस प्रदर्शन को भविष्य में भी बनाये रखें। यह रैंकिंग जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा स्वतंत्र एजेंसी एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एएमएस) के माध्यम से कराए गए मूल्यांकन के आधार पर जारी की गई है।

स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 के अंतर्गत मणिपुर को छोडक़र 27 राज्यों एवं 6 केंद्र शासित प्रदेशों के 744 जिलों, 20,659 गांवों, 3,22,033 ग्रामीण परिवारों, 1,03,607 सार्वजनिक संस्थानों एवं सामुदायिक स्वच्छता परिसरों तथा देशभर के 3,701 ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों का मूल्यांकन किया गया। उपायुक्त ने कहा कि जिला की रैंकिंग को प्रत्यक्ष निरीक्षण - 40 प्रतिशत, सेवा स्तर की प्रगति - 30 प्रतिशत, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण - 20 प्रतिशत तथा नागरिक फीडबैक - 10 प्रतिशत के मानकों के आधार पर निर्धारित की गई है। मूल्यांकन के दौरान स्वच्छता अवसंरचना, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सेवा वितरण, फील्ड सत्यापन तथा जनभागीदारी जैसे पहलुओं का विस्तृत आकलन किया गया।

अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला परिषद तथा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सीईओ नरेंद्र कुमार ने कहा कि यह उपलब्धि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत वर्षों की सुनियोजित कार्ययोजना, प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनभागीदारी का परिणाम है। जिला में ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन शेड स्थापित किए गए, नियमित श्रमदान अभियान चलाए गए, कम्पोस्ट गड्ढे विकसित किए गए, सोख्ता गड्ढों एवं सामुदायिक सोख्ता प्रणालियों का निर्माण कराया गया तथा नालों पर स्क्रीनिंग व्यवस्था सुनिश्चित की गई। ग्रे-वॉटर के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किचन गार्डन विकसित किए गए। ग्राम पंचायतों के सहयोग से घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू की गई तथा वैज्ञानिक फीकल स्लज प्रबंधन के लिए पंजीकृत निजी डिसलॉजिंग ऑपरेटरों की सेवाएं ली गईं। बालिका विद्यालयों में सैनिटरी अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण हेतु इंसीनरेटर स्थापित किए गए। इसके साथ ही व्यापक जन-जागरूकता अभियान, दीवार लेखन तथा प्लास्टिक कचरा पृथक्करण अभियान भी चलाए गए।