बच्चों में डायबिटीज-मोटापा बढ़ा, हार्मोनल बीमारियां चिंताजनकः कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

पीजीआईएमएस में पीडियाट्रिक एंडोक्राइन अपडेट-2026 आयोजित, समय पर पहचान और इलाज पर जोर।

बच्चों में डायबिटीज-मोटापा बढ़ा, हार्मोनल बीमारियां चिंताजनकः कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल

रोहतक, गिरीश सैनी। बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों के कारण बच्चों में डायबिटीज, थायराइड, मोटापा और ग्रोथ से जुड़ी हार्मोनल समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। यह बात पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने शनिवार को पीजीआईएमएस में आयोजित पीडियाट्रिक एंडोक्राइन अपडेट-2026 में कही।

बाल रोग विभाग की ओर से इंडियन सोसाइटी फॉर पीडियाट्रिक एंड एडोलिसेंट एंडोक्राइनोलॉजी और आईएपी रोहतक के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज, हाइपोथायरायडिज्म, मोटापा, लंबाई बढ़ने में कमी या तेजी और समय से पहले अथवा देर से यौवन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। फास्ट फूड-जंक फूड का बढ़ता चलन, मोबाइल-टीवी पर अधिक समय और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में हार्मोन संबंधी गड़बड़ी की पहचान होने पर भविष्य की कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है।

समय पर पहचान से सुधर सकता है भविष्य

डीन डॉ. अशोक चौहान ने कहा कि पीजीआईएमएस गैर-संचारी रोगों पर शोध और प्रमाण आधारित उपचार को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। विभागाध्यक्ष डॉ. एन.डी. वासवानी ने प्रतिभागियों का स्वागत किया।

आयोजन सचिव और बाल एंडोक्राइनोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. अंजली वर्मा ने बताया कि बच्चे की लंबाई, वजन और विकास हार्मोनल स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेत हैं। अचानक वजन बढ़ना या घटना, उम्र के अनुसार कम लंबाई, समय से पहले दाढ़ी-मूंछ आना, देर से यौवन और ब्लड शुगर में असामान्य बदलाव चेतावनी संकेत हो सकते हैं।

कार्यक्रम में जन्मजात थायराइड की कमी, हार्मोनल आपात स्थिति, टाइप-1 डायबिटीज और यौवन संबंधी समस्याओं पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। डिसऑर्डर्स ऑफ सेक्सुअल डेवलपमेंट पर पैनल चर्चा भी हुई। कार्यक्रम में डॉ. आलोक खन्ना, डॉ. कपिल भल्ला, डॉ. वंदना, डॉ. नेहा समेत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर, फैकल्टी और पीजी विद्यार्थी शामिल हुए।