कचरे का उठान न होने से रोहतक की दशा बदहाल, सड़कों पर फैले कूड़े से बीमारियां फैलने की आशंका
रोहतक, गिरीश सैनी। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते रोहतक शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लगभग एक सप्ताह से अधिक समय से कचरा उठान प्रभावित होने के कारण शहर की प्रमुख सड़कों, चौक-चौराहों और बाजारों के आसपास कूड़े के ढेर लग गए हैं। हालात यह है कि शहर के अधिकतर स्थानों पर सड़कें ही अस्थायी डंपिंग पॉइंट बन गई है।
सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण घरों और बाजारों से निकलने वाला कचरा नियमित रूप से नहीं उठ पा रहा। जगह-जगह फैले कचरे से दुर्गंध फैल रही है और राहगीरों तथा स्थानीय दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख मार्गों पर कूड़े के ढेर यातायात के लिए भी परेशानी पैदा कर रहे हैं।
सफाई कर्मचारियों की मांगों और प्रशासन के बीच समाधान नहीं निकलने से कचरा उठाने वाले वाहनों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार शहर में 200 से अधिक कूड़ा उठाने वाले वाहन खड़े हैं। इससे रोजाना निकलने वाला कचरा उठाने की व्यवस्था लगभग ठप हो गई है।
जानकारी के अनुसार सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और हड़ताल को 18 अगस्त तक बढ़ाया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़क के बीच में नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा कूड़ा डालने के समाचार भी हैं। शहर में प्रमुख रूप से अंबेडकर चौक (निगम कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर), न्यायिक परिसर का सामने, लेबर चौक, सैनी स्कूल रोड, बाल भवन के सामने, गोहाना अड्डा, एलिवेटेड पुल, मानसरोवर पार्क के पास, अनाज मंडी गेट के निकट, हिसार रोड पर वाल्मीकि चौक के निकट, रुपया चौक के निकट, नया बस स्टैंड के निकट, पुराना आईटीआई मैदान, गांधी कैंप, पालिका बाजार के निकट, कूड़ा-कचरा सड़क पर फैला रहा।
इस बीच, शहर में लगातार बढ़ते कचरे को लेकर नागरिकों में भी नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कचरे का उठान शुरू नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। वर्षा के मौसम में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा कचरा लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। कूड़े से दुर्गंध के साथ मच्छर-मक्खियां पनपने का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में लंबे समय तक सफाई प्रभावित रहने से बीमारियों का खतरा बना हुआ है। शहरवासियों का सवाल है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रही खींचतान का खामियाजा आखिर आम जनता क्यों भुगते।
इस सबके बीच, किसी भी मौके पर झाड़ू उठाकर अखबारों की सुर्खियों बटोरने वाले जन प्रतिनिधि, पार्षद व सामाजिक संस्थाएं सिरे से गायब हैं। शहरवासियों का कहना है कि आए दिन सफाई अभियान चलाने वाले ये लोग इस जरूरत की घड़ी में आखिर कहां लुप्त हो गए हैं।
Girish Saini 

