राजस्व सेवाओं को डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और त्वरित निस्तारण से किया जाएगा और मजबूतः उपायुक्त सचिन गुप्ता

राजस्व अदालतों में लंबित मामलों की निपटान प्रक्रिया में तेजी लाने, सरकारी भूमि की सुरक्षा व प्रभावी उपयोग बारे दिए निर्देश।

राजस्व सेवाओं को डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और त्वरित निस्तारण से किया जाएगा और मजबूतः उपायुक्त सचिन गुप्ता

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने राजस्व विभाग की एक विस्तृत समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिले में भूमि अभिलेख प्रबंधन, इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों के निस्तारण, न्यायालयों में लंबित मामलों, रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, स्टाम्प शुल्क की निगरानी तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा संबंध आम नागरिकों से होता है, इसलिए सभी सेवाएं प्रभावी ढंग से और बिना अनावश्यक देरी के उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

बैठक में बताया गया कि जिले में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मॉडर्न रेवेन्यू रिकॉर्ड रूम (एमआरआरआर) पहल के तहत 1.41 करोड़ से अधिक राजस्व रिकॉर्ड की इमेजिंग कर उन्हें डिजिटाइज व कैटलॉग किया गया है, जिससे भूमि अभिलेखों का बेहतर संरक्षण और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा।

उपायुक्त ने जिला में लंबित इंतकाल मामलों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि 30 दिन से अधिक समय से लंबित सभी इंतकाल मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए और उनकी प्रविष्टियां तुरंत डिजिटल भूमि अभिलेख प्रणाली में अपडेट की जाएं। बैठक में जमाबंदी तैयार करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सत्यापन व प्रकाशन की शेष प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए ताकि भूमि अभिलेख अद्यतन और सटीक बने रहें। हरियाणा लार्ज स्केल मैपिंग कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान बताया गया कि हजारों ततीमा प्रविष्टियों और कैडस्ट्रल नक्शों को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है, जिससे भविष्य में भूमि विवादों में कमी आएगी और भूमि अभिलेखों की सटीकता में सुधार होगा।

बैठक में विभिन्न स्तरों पर लंबित राजस्व न्यायालय मामलों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कहा कि संपत्ति लेनदेन की कड़ी निगरानी जारी रखी जाए ताकि संपत्तियों का सही मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके और सरकारी राजस्व की सुरक्षा बनी रहे। बैठक में सरकारी भूमि की स्थिति और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए कि सरकारी तथा शामलात भूमि से अतिक्रमण हटाने के अभियान को और तेज किया जाए तथा सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि उसका उपयोग जनहित के कार्यों के लिए किया जा सके। बैठक में एग्रीस्टैक के क्रियान्वयन की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिसके तहत किसानों की भूमि अभिलेखों को कृषि डेटाबेस से डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है, जिससे बेहतर योजना निर्माण, नीति निर्धारण और कृषि सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी संभव हो सकेगी।

नागरिक सुविधा पर जोर देते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिए कि हरिस/हलरिस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को भूमि से संबंधित सेवाएं पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन रोहतक में पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक केंद्रित राजस्व प्रशासन प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भूमि अभिलेख सटीक रहें, सेवाएं तेज हों और सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार, सांपला के एसडीएम उत्सव आनंद, रोहतक के एसडीएम आशीष कुमार, महम के एसडीएम विपिन कुमार, डीआरओ प्रमोद चहल, रोहतक के तहसीलदार यशपाल शर्मा, कलानौर के तहसीलदार दिनेश सिंह, महम के तहसीलदार रवि कुमार, नायब तहसीलदार दीपक, जितेंद्र, राहुल बूरा व अशोक कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।