ग्रीन इकोनॉमी पर शोध के नए औजारों से रूबरू हुए शोधार्थी

ग्रीन इकोनॉमी पर शोध के नए औजारों से रूबरू हुए शोधार्थी

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के अर्थशास्त्र विभाग में ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन विषय पर चल रहे आईसीएसएसआर प्रायोजित 10 दिवसीय रिसर्च मेथडोलॉजी कोर्स में शोधार्थियों को पर्यावरणीय संसाधनों के मूल्यांकन, प्राकृतिक संपदा, डिजिटल शोध संसाधनों और शोध को व्यवस्थित करने की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए विषय की समझ के साथ उपयुक्त संसाधनों और व्यवस्थित शोध प्रक्रिया का उपयोग जरूरी है।

जवाहरलाल नेहरू विवि, नई दिल्ली के सेंटर फॉर स्टडी ऑफ रीजनल डेवलपमेंट की प्रो. इंद्राणी रॉय चौधरी ने पर्यावरणीय वस्तुओं एवं सेवाओं के गैर-बाजार मूल्यांकन पर दो व्याख्यान दिए। उन्होंने प्राकृतिक पूंजी लेखांकन, समावेशी संपदा, सतत विकास तथा पर्यावरणीय संसाधनों के आर्थिक मूल्यांकन की अवधारणाएं समझाईं। उन्होंने फ्री-राइडर समस्या और उपयोग तथा गैर-उपयोग मूल्य की जानकारी भी दी।

प्रो. राजेश पुनिया ने रिसर्च मैट्रिक्स की उपयोगिता बताई। कोर्स डायरेक्टर प्रो. रामफूल ओहल्याण ने बताया कि प्रतिभागियों को विवि की ई-लाइब्रेरी, स्कोपस और ओेएनओएस जैसे डिजिटल शोध संसाधनों के प्रभावी उपयोग की जानकारी भी दी गई।