पीजीआईएमएस की डॉ. ग्रंथिका शर्मा का शोध पत्र नैपकॉन में देशभर में दूसरे स्थान पर
कुलपति डॉ. अग्रवाल बोले—सटीक इलाज के लिए सही बीमारी की पहचान जरूरी
रोहतक, गिरीश सैनी। पीजीआईएमएस, रोहतक की एमडी रेजिडेंट डॉ. ग्रंथिका शर्मा के दुर्लभ बीमारी पर शोध पत्र को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। जयपुर में आयोजित नैपकॉन-2026 में उनके शोध को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ पेपर चुना गया।
शोध में छाती में भूरे रंग का मवाद भरने, बुखार और दर्द जैसे लक्षणों के पीछे दुर्लभ बीमारी की संभावना उजागर की गई है। ऐसे मामलों को केवल टीबी समझने के बजाय सही जांच से बीमारी की पहचान जरूरी है। समय पर निदान होने पर बिना बड़े ऑपरेशन के मरीज का इलाज संभव है।
यूएचएसआर के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने डॉ. ग्रंथिका को बधाई देते हुए कहा कि सही बीमारी की पहचान ही सटीक इलाज का आधार है। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं और करीब दस दिन तक नली के जरिए मवाद निकालकर इलाज किया जा सकता है। पीजीआईएमएस में यह उपचार निशुल्क उपलब्ध है।
डॉ. ग्रंथिका ने रेयर मेनिफेस्टेशन ऑफ थोरेसिक एनोमली लीडिंग टू एम्पाइमा एंड एब्डोमिनल कॉम्प्लिकेशन्स विषय पर शोध प्रस्तुत किया था।

Girish Saini

