प्रसिद्ध फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी सुपवा के छात्रों को सिखा रही स्क्रीनप्ले राइटिंग के गुर

प्रसिद्ध फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी सुपवा के छात्रों को सिखा रही स्क्रीनप्ले राइटिंग के गुर

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक में फिल्म एंड टेलीविजन फैकल्टी में आयोजित कार्यशाला में छात्र फिल्मों की स्क्रीनप्ले राइटिंग (पटकथा लेखन) के गुर सीख रहे हैं। इस कार्यशाला में प्रसिद्ध फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी छात्रों के साथ पटकथा लेखन के टिप्स साझा कर रही हैं।

एफटीवी के एफसी महेश टीपी ने बताया कि प्रसिद्ध फिल्मी पटकथा लेखक पुबाली चौधरी चर्चित हिन्दी फिल्मों रॉक ऑन, काई पो चे व रॉक ऑन-टू के लिए पटकथा लिख चुकी हैं। इनमें से रॉक ऑन को साल 2008 में सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, जबकि काई पो चे को साल 2014 में सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल हुआ। एफटीआईआई, पुणे में स्क्रीनप्ले लेखन विभाग में मेंटर और मानद विभागाध्यक्षा रह चुकी पुबाली चौधरी सुपवा में डायरेक्शन बैच के छात्रों की स्क्रीनप्ले कार्यशाला में बतौर विशेषज्ञ भाग ले रही है।

कार्यशाला में छात्रों को टिप्स देते हुए पुबाली चौधरी ने कहा कि स्क्रीनप्ले फिल्माए जाने के लिए लिखे जाते हैं, न कि पढ़े जाने के लिए। एक उपन्यासकार एक चरित्र के आंतरिक जीवन पर तीन पैराग्राफ खर्च कर सकता है, एक स्क्रीनराइटर को उसी भावनात्मक स्थिति को कार्रवाई, व्यवहार या संवाद के माध्यम से बाहर निकालना होगा। कैमरा केवल वही कैप्चर कर सकता है जो वह देख और सुन सकता है। आंतरिक स्थितियां लेंस के लिए तब तक अदृश्य हैं, जब तक वे भौतिक दुनिया में दिखाई न दें। उन्होंने कहा कि प्रारूप इस बाधा को मजबूत करता है। मानक स्क्रीनप्ले प्रारूप लगभग स्क्रीन समय प्रति मिनट एक पृष्ठ चलता है। उन्होंने बताया कि स्क्रीनप्ले सहयोगी दस्तावेज हैं। उन्हें निर्देशकों, निर्माताओं और अक्सर अन्य लेखकों द्वारा फिर से लिखा जाता है, इससे पहले कि कुछ भी स्क्रीन तक पहुंचे। यह किसी भी फिल्म का ब्लूप्रिंट है। इस बात को ध्यान में रखकर लिखना ही क्रिया लाइनों से लेकर चरित्र परिचय तक सब कुछ बदल देता है।

कुलपति डॉ अमित आर्य ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि हमारा प्रयास देश के सर्वश्रेष्ठ फिल्मी पटकथा लेखकों को छात्रों के बीच लेकर आना है, ताकि वे विद्यार्थियों को बॉलीवुड की जरूरत के मुताबिक तैयार कर सकें।