पीजीआईडीएस में हुआ दुर्लभ रोग का निदान, विश्व में अपनी तरह का 5वां दुर्लभ मामला

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने शोधार्थियों को दी बधाई।

पीजीआईडीएस में हुआ दुर्लभ रोग का निदान, विश्व में अपनी तरह का 5वां दुर्लभ मामला

रोहतक, गिरीश सैनी। पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (पीजीआईडीएस) के ओरल पैथोलॉजी विभाग ने विश्व में अपनी तरह के 5वें दुर्लभतम केस का सफलतापूर्वक डायग्नोज किया है। कुलपति  डॉ. एच.के. अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर विभागाध्यक्षा डॉ माला कंबोज एवं शोधार्थी डॉ. वरुण को बधाई दी है।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि विश्व में 5वां केस डायग्नोज करना यह साबित करता है कि हमारे संस्थान में शोध का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ केस का निदान न केवल मरीज के लिए जीवनदायी है, बल्कि मेडिकल साइंस के लिए भी नया रास्ता खोलता है।

विभागाध्यक्षा डॉ. माला कंबोज ने बताया कि रिसर्च के दौरान पाया गया कि 19 वर्षीय युवक के निचले जबड़े में असामान्य सूजन (रसौली) थी। सामान्य जांच में बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी, फिर नवीनतम तकनीकों जैसे इम्युनोहिस्टोकैमिस्ट्री से जांच के बाद रिपोर्ट में सामने आया कि ये डेस्मोप्लास्टिक फाइब्रोब्लास्ट मा नामक अत्यंत दुर्लभ बिनाइन ट्यूमर है। उन्होंने बताया कि यह विश्व में अपनी तरह का 5वां केस है। इससे पहले दुनिया में ऐसे सिर्फ 4 केस दर्ज हैं। इतने दुर्लभ केस का समय रहते सटीक निदान होना ही मरीज की जान बचाने में अहम था। एडवांस तकनीक से जल्द निदान होने के कारण डेंटल कॉलेज के चिकित्सकों ने मरीज का तुरंत ऑपरेशन कर निचले जबड़े के प्रभावित हिस्से को हटाकर वहां प्लेट लगाई। अब मरीज फॉलो-अप पर है और सामान्य जीवन जी रहा है।

डॉ माला कंबोज ने बताया कि ओरल पैथोलॉजी विभाग में इस तरह के दुर्लभ ओरल कैंसर एवं प्री-कैंसर केस पर लगातार सक्रिय शोध जारी है। आधुनिक तकनीक जैसे पीसीआर और एफआईएसएच का भी समय-समय पर उपयोग किया जाता है।

ओरल पैथोलॉजी विभाग के पीजी छात्र डॉ. वरुण को रोहतक में आयोजित एनडबल्यूआईएपीएम-2026 में डेस्मोप्लास्टिक फाइब्रोब्लास्टोमा पर सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति का पुरस्कार मिला।

कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने कहा कि पीजीआईडीएस रेयर डिजीज पर रिसर्च का हब बन रहा है। निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि एडवांस डायग्नोस्टिक तकनीकों से ऐसे केस भी पकड़ में आ रहे हैं जो पहले मिस हो जाते थे। पीजीआईडीएस की प्राचार्या डॉ मनु राठी ने कहा कि भविष्य में विभाग में ओरल प्री-कैंसर एवं कैंसर पर और अधिक गहन शोध किया जाएगा।