रेबीज घातक, लेकिन 100% रोकथाम संभवः कुलपति डॉ. अग्रवाल

समय पर घाव की सफाई और टीकाकरण से बच सकती है जान

रेबीज घातक, लेकिन 100% रोकथाम संभवः कुलपति डॉ. अग्रवाल

रोहतक, गिरीश सैनी। विश्व रेबीज दिवस पर पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि (यूएचएसआर) में रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण पर जागरूकता वेबिनार आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि रेबीज बेहद घातक बीमारी है, लेकिन समय पर सही उपचार से इसकी पूरी तरह रोकथाम संभव है। लक्षण सामने आने के बाद बीमारी लगभग जानलेवा हो जाती है, इसलिए पशु के काटने के बाद तत्काल उपचार जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कुत्ते या किसी संदिग्ध पशु के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोकर बिना देरी अस्पताल पहुंचना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स पूरा करना जरूरी है।

पीजीआईएमएस निदेशक प्रो. डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि रेबीज नियंत्रण के लिए मानव जागरूकता के साथ पशुओं का टीकाकरण भी जरूरी है। संस्थान की ओपीडी में एंटी-रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन उपलब्ध कराया गया है।

वेबिनार में डॉ. रमेश वर्मा और किम्स बेंगलुरु के डॉ. रविश एच.एस. ने उपचार एवं आधुनिक प्रोटोकॉल की जानकारी दी। करीब 150 डॉक्टरों, फैकल्टी, नर्सिंग स्टाफ और विद्यार्थियों ने भाग लिया।