पंजाब के हिंदी साहित्यकारों का हुआ सम्मान, जीएनडीयू में विशेष समारोह

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिंदी-विभाग की ओर से 'हिंदी पखवाड़ा-2026' के अंतर्गत पंजाब के 25 प्रतिष्ठित साहित्यकारों को ‘पंजाब हिंदी साहित्य रत्न’ सम्मान और 3 साहित्यकारों को विशिष्ट श्रेणी सम्मान से अलंकृत किया गया। 

पंजाब के हिंदी साहित्यकारों का हुआ सम्मान, जीएनडीयू में विशेष समारोह

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिंदी-विभाग की ओर से 'हिंदी पखवाड़ा-2026' के अंतर्गत पंजाब के 25 प्रतिष्ठित साहित्यकारों को ‘पंजाब हिंदी साहित्य रत्न’ सम्मान और 3 साहित्यकारों को विशिष्ट श्रेणी सम्मान से अलंकृत किया गया। 
यह जानकारी देते हुए जीएनडीयू, अमृतसर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार ने बताया कि पंजाब की हिंदी साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करने वाले साहित्यकारों के योगदान का अभिनन्दन करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा कि इन साहित्यकारों ने अपनी रचनात्मकता, साहित्य-साधना और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य को पर्याप्त समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के माननीय उप-कुलपति प्रो. करमजीत सिंह की प्रेरणा और कुशल नेतृत्व में हिंदी विभाग द्वारा लगातार साहित्यिक गतिविधियों का अयोजन किया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. सुनील कुमार ने स्वागत उद्बोधन में सभी विद्वानों, अतिथियों और प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान समारोह किसी व्यक्ति-विशेष को स्मरण करने के साथ-साथ उसके साहित्यिक और बौद्धिक अवदान को व्यापक समाज तक पहुँचाने का माध्यम भी बनते हैं। उन्होंने प्रो. रामसजन पांडेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को हिंदी साहित्य की आलोचनात्मक परंपरा की महत्त्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि उनके विचारों और साहित्यिक दृष्टि पर गंभीर विमर्श आज की पीढ़ी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि समारोह में व्यक्त विचारों और साझा की गई स्मृतियों के माध्यम से प्रो. पांडेय के साहित्यिक योगदान को नए संदर्भों में समझने तथा शोधार्थियों और विद्यार्थियों तक पहुँचाने की दिशा में सार्थक पहल होगी।
‘पंजाब हिंदी साहित्य रत्न’ से अलंकृत होने वाले साहित्यकारों में पद्मश्री प्रो. हरमहेंद्र सिंह बेदी, प्रो. विनोद तनेजा, श्री गोपाल कृष्ण शर्मा 'फिरोजपुरी', डॉ. अजय शर्मा, श्री प्रेम विज, श्री अशोक भंडारी 'नादिर', श्री सैली बलजीत, प्रो. मधु संधु, डॉ. वीणा विज, डॉ. प्रोमिला अरोड़ा, डॉ. सुरेश सेठ, श्री सिमर सदोष, डॉ. लेखराज शर्मा, प्रो. मोहन सपरा, डॉ. राजेंद्र टोकी, डॉ. निर्मल कौशिक, डॉ. तरसेम गुजराल, प्रो. सीमा जैन, डॉ. सरला भारद्वाज, डॉ. धर्मपाल साहिल, डॉ. विनोद कालरा, डॉ. राकेश प्रेम, श्री मनोज धीमान, प्रो. विनोद कुमार और डॉ. संजीव डावर शामिल थे।
इसके अतिरिक्त समारोह में साहित्य और शोध के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो. रवि कुमार 'अनु' को वर्ष 2026 का 'प्रो. रामसजन पांडेय स्मृति सम्मान', प्रो. सुखविंदर कौर बाठ को 'पंजाब लोकधारा हिंदी सम्मान' और डॉ. बिहारी झा को 'राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन उत्कृष्टता सम्मान' प्रदान किया गया। पंजाबी विश्वविद्यालय , पटियाला के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रवि कुमार ‘अनु’ ने अपने संबोधन में उद्भट आलोचक एवं विद्वान प्रो. रामसजन पांडेय के साथ जुड़ी अपनी आत्मीय स्मृतियों और अनुभवों को साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व के विद्वतापूर्ण और मानवीय पक्षों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रो. पांडेय का साहित्यिक चिंतन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें भारतीय साहित्य, समाज और संस्कृति की गहरी समझ तथा मानवीय सरोकारों की व्यापक दृष्टि विद्यमान थी। उनके साथ बिताए समय को स्मरण करते हुए उन्होंने उनकी सहजता, आत्मीयता, अध्ययनशीलता और आलोचनात्मक विवेक को विशेष रूप से रेखांकित किया तथा कहा कि ऐसे विद्वान अपने विचारों और कृतित्व के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी प्रेरणा-स्रोत बने रहते हैं। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलाधिपति पदमश्री प्रो. हरमहेंद्र सिंह बेदी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. रामसजन पांडेय के साहित्यिक अवदान और हिंदी आलोचना के क्षेत्र में उनके महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्वान की वास्तविक पहचान उसके व्यापक अध्ययन, मौलिक चिंतन और साहित्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से निर्मित होती है और प्रो. पांडेय का व्यक्तित्व इन सभी विशेषताओं का समुच्चय था। उन्होंने साहित्यिक आलोचना को केवल रचनाओं के मूल्यांकन का माध्यम न मानकर समाज, संस्कृति और जीवन-मूल्यों को समझने की प्रक्रिया के रूप में देखने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, प्रो. पांडेय की स्मृतियों को जीवंत रखना हिंदी साहित्य की समृद्ध आलोचनात्मक परंपरा और नई पीढ़ी के बीच संवाद को निरंतर बनाए रखने का भी एक सार्थक प्रयास है। बतौर मुख्य अतिथि गौड़ ब्राह्मण डिग्री महाविद्यालय, रोहतक की पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू शर्मा ने अपने संबोधन में प्रो. रामसजन पांडेय के व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि उनका साहित्यिक अवदान हिंदी आलोचना की समृद्ध परंपरा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रो. पांडेय की विद्वत्ता, अध्ययनशीलता और साहित्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने अनेक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य-प्रेमियों को प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी विद्वान को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उसकी स्मृतियों को संजोने से नहीं, बल्कि उसके विचारों, साहित्यिक दृष्टि और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने से मिलती है। डॉ. अंजू शर्मा ने ऐसे आयोजनों को साहित्यिक परंपरा और समकालीन पीढ़ी के बीच संवाद स्थापित करने का सार्थक माध्यम बताते हुए प्रो. रामसजन पांडेय की स्मृतियों को निरंतर जीवित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। बतौर विशिष्ट अतिथि स्थायी लोक अदालत (पीयूएस), अमृतसर के पूर्व चेयरमैन श्री नरेश मोदगिल ने साहित्यकारों के सम्मान को साहित्य और समाज के बीच जीवंत संबंध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपने सृजन के माध्यम से समाज की संवेदनाओं, अनुभवों और सरोकारों को अभिव्यक्ति देते हैं, इसलिए उनके योगदान का सम्मान करना हमारी साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा के प्रति सम्मान है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को रचनाकारों के उत्साहवर्धन के साथ-साथ नई पीढ़ी को साहित्य के प्रति प्रेरित करने का महत्त्वपूर्ण माध्यम बताया।
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार के अनुसार यह अनूठा और ऐतिहासिक आयोजन पंजाब में हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा, साहित्यकारों के योगदान और हिंदी के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा। उन्होंने इस साहित्यिक महाकुंभ के आयोजन में विशेष सहयोग के लिए विश्वविद्यालय-प्रशासन सहित डॉ. खेमराज तुली (तुली हार्ट केयर सेंटर, अमृतसर), आर्किटेक्ट निखिल रावरा (बी.आर.ग्रुप, अमृतसर), श्रीमती रिद्धिमा साहिल अरोड़ा (आर.वी.एस. हेल्थ हब, अमृतसर) और रोटरेक्ट क्लब, अमृतसर वेस्ट का आभार प्रकट किया। इस अभिनव पहल से हिंदी साहित्य जगत में हर्ष की लहर है। इस महती समागम के संकल्प के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश के विद्वानों और साहित्यकारों ने प्रो. सुनील कुमार की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन मुकेश कुमार , रमन शर्मा और शशि कुमारी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विनोद कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजकुमार, डॉ. दीप्ति, डॉ. लवलीन कौर, मैडम पिंकी शर्मा, सक्षम, सृष्टि, डॉ. नेहा हंस, डॉ. बलजीत कौर रियाड़, डॉ. राजविंदर कौर, डॉ. विशाल भारद्वाज, योगेश कुमार, दिनेश पुरी, दीपक शर्मा, राकेश कुमार, मैडम आस्था, हर्षवर्धन झा, मैडम सुषमा, मैडम सैली बलजीत, वंदना शर्मा, डॉ. हरजीत ग्रोवर, श्रीमती ग्रोवर, डॉ सपना शर्मा, डॉ. संजय चौहान, साहिल महाजन, जगदीप सिंह, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू के हिंदी विभाग में सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. विनय कुमार शुक्ला सहित बड़ी संख्या में विभाग के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।