लाइफस्टाइल ने बदला दिल का मिजाज, युवाओं में बढ़ा खतरा: कुलपति डॉ अग्रवाल
रोहतक, गिरीश सैनी। विश्व हृदय दिवस पर यूएचएसआर के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि हृदय रोग अब उम्र की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल के कारण युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। इस वर्ष की थीम डोंट मिस ए बीट के तहत उन्होंने लोगों से हृदय से जुड़े शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की।
कुलपति डॉ. अग्रवाल ने कहा कि भारत में कुल मौतों में करीब 27-28 फीसदी मौतें हृदय रोगों से होती हैं। पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीयों में हृदय रोग 10-20 साल पहले सामने आ रहा है। उन्होंने रोजाना कम से कम 40 मिनट व्यायाम, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच की सलाह दी।
पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने कहा कि सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर अथवा दर्द का हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक जाना हार्ट अटैक के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार ने बताया कि संस्थान में हृदय रोगों का इलाज नि:शुल्क उपलब्ध है। विभाग में रोजाना करीब 450 मरीज ओपीडी में आते हैं। हर माह औसतन 110 बाईपास सर्जरी और 55-60 एंजियोप्लास्टी की जा रही हैं।
जनसंपर्क विभाग इंचार्ज डॉ. मंजूनाथ बीसी ने युवाओं में तनाव, धूम्रपान, शराब और जंक फूड को बढ़ते मामलों का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने 7-8 घंटे नींद, नियमित व्यायाम और बीपी, शुगर व कोलेस्ट्रॉल की जांच की सलाह दी।

Girish Saini

