जलवायु संकट में खेती की राह दिखाएगी प्रो. गिल की 37वीं पुस्तक
एमडीयू कुलपति ने किया विमोचन, एल्सेवियर अकादमिक प्रेस (यूके) से प्रकाशित।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के प्रो. एस.एस. गिल द्वारा संपादित पुस्तक एग्रीकल्चरल बायोस्टिमुलैंट्स फॉर मिटिगेशन ऑफ़ साल्ट, ड्रोउट एंड हीट स्ट्रेस का कुलपति प्रो. मिलाप पूनिया ने विमोचन किया। पुस्तक का प्रकाशन एल्सेवियर अकादमिक प्रेस, यूके ने किया है। इसमें जलवायु परिवर्तन के बीच फसलों को सूखा, अत्यधिक गर्मी और मिट्टी की बढ़ती लवणीयता से बचाने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के वैज्ञानिक उपायों पर शोध शामिल है।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनिया ने प्रो. गिल को पुस्तक प्रकाशन पर बधाई देते हुए उनके शोध योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्लांट स्ट्रेस बायोलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी और टिकाऊ फसल सुधार के क्षेत्र में प्रो. गिल का शोध महत्वपूर्ण है। उनके शोध को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान एमडीयू के लिए गौरव की बात है। इस दौरान सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी की निदेशक प्रो. रितु गिल भी मौजूद रही।
प्रो. एस.एस. गिल ने बताया कि पुस्तक में बदलते मौसम और बढ़ते पर्यावरणीय दबाव के बीच फसलों की वृद्धि, उत्पादकता और तनाव सहनशीलता बढ़ाने के उपायों पर फोकस किया गया है। इसमें लाभकारी सूक्ष्मजीवों, समुद्री शैवाल अर्क, बायोचार, पादप वृद्धि नियामकों, नैनो फॉर्मुलेशन और पॉलीएमाइन्स सहित विभिन्न बायोस्टिमुलेंट्स के उपयोग से जुड़े शोध को शामिल किया गया है।
पुस्तक में बायोस्टिमुलेंट्स के माध्यम से पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य, फसल उत्पादकता और प्रतिकूल परिस्थितियों में पौधों की सहनशीलता बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। यह प्रो. एसएस गिल की 37वीं पुस्तक है। उनके शोध कार्यों को 30 हजार से अधिक साइटेशन मिल चुके हैं, जबकि उनका एच-इंडेक्स 63 है। पुस्तक बायो स्टिमुलैंट्स एंड प्रोटेक्टिव बायोकैमिकल एजेंट्स श्रृंखला के तहत प्रकाशित हुई है।

Girish Saini 

