प्रो दीप्ति हुड्डा ने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच, संतुलित दिनचर्या और स्वस्थ संवाद अपनाने का आह्वान किया

माइक्रोबायोलॉजी विभाग में युवाओं की सकारात्मक सोच पर व्याख्यान आयोजित।

प्रो दीप्ति हुड्डा ने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच, संतुलित दिनचर्या और स्वस्थ संवाद अपनाने का आह्वान किया

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में युवाओं में सकारात्मक भावनाओं का निर्माणः प्रसन्नता का संवर्धन विषय पर एक विस्तार व्याख्यान आयोजित किया गया।

बतौर मुख्य वक्ता, मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर एवं प्रतिष्ठित मनोवैज्ञानिक प्रो दीप्ति हुड्डा ने अपने प्रभावशाली व्याख्यान में युवाओं के जीवन में सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी और व्यस्त जीवन में युवाओं को अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सकारात्मक भावनाओं का विकास, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रो. दीप्ति हुड्डा ने कहा कि प्रसन्नता, आशावाद, आत्म-स्वीकृति और कृतज्ञता जैसे सकारात्मक भाव युवाओं के व्यक्तित्व को सशक्त बनाते हैं। यदि विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन में सकारात्मक सोच, संतुलित दिनचर्या और स्वस्थ संवाद को अपनाएं तो वे तनाव और नकारात्मकता से बेहतर तरीके से निपट सकते हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के साथ-साथ मानसिक प्रसन्नता और संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्षा डॉ. पूजा सुनेजा ने प्रारंभ में स्वागत भाषण दिया। व्याख्यान के दौरान वक्ता ने विद्यार्थियों द्वारा विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रश्नों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का संतोषजनक उत्तर दिया और उन्हें सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।