चोट से बचेंगे खिलाड़ी, मैदान पर ही मिलेगा त्वरित इलाज: पीजीआईएमएस में 30 अगस्त को स्पोर्ट्स मेडकॉन 2026
रोहतक, गिरीश सैनी। हरियाणा के खिलाड़ियों को खेल के दौरान लगने वाली चोटों से बचाने और चोट के कारण अहम प्रतियोगिताओं से बाहर होने की समस्या कम करने के लिए पीजीआईएमएस, रोहतक का स्पोर्ट्स मेडिसिन विभाग 30 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर - स्पोर्ट्स मेडकॉन 2026 नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा। इस कॉन्फ्रेंस का फोकस -प्रिवेंशन एंड ट्रीटमेंट ऑफ स्पोर्ट्स इंजरी रहेगा। यह जानकारी स्पोर्ट्स मेडिसिन एवं स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश रोहिल्ला ने दी। इस दौरान जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ उमेश यादव एवं डॉ जितेंद्र वाधवानी सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
डॉ. रोहिल्ला ने कहा कि कई बार ओलंपिक, एशियन गेम्स या अन्य बड़ी प्रतियोगिताओं से ठीक पहले चोट लगने से खिलाड़ी की वर्षों की मेहनत प्रभावित हो जाती है। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य कोचों को मैदान पर ही चोट का शुरुआती और सही प्रबंधन करने के लिए प्रशिक्षित करना है, ताकि छोटी चोट गंभीर समस्या या सर्जरी का कारण न बने और खिलाड़ी जल्द खेल में वापसी कर सके।
हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, राई, सोनीपत और लिंब रीकंस्ट्रक्शन सोसाइटी, रोहतक के सहयोग से आयोजित की जा रही इस कॉन्फ्रेंस में बीसीसीआई के पूर्व फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. वैभव डागा स्पोर्ट्स टेपिंग के जरिए चोट के त्वरित प्रबंधन पर विशेष प्रैक्टिकल वर्कशॉप आयोजित करेंगे। इसके अलावा डोपिंग और एंटी-डोपिंग नियमों पर भी विशेषज्ञ सत्र होगा।
डॉ. रोहिल्ला ने बताया कि कॉन्फ्रेंस को प्रदेश के खिलाड़ियों और कोचों तक पहुंचाने के लिए व्यापक आउटरीच अभियान चलाया गया है। टीम में पीजीआईडीएस के पब्लिक हेल्थ विभागाध्यक्ष डॉ. मंजूनाथ, जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ. उमेश यादव और स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. मंदीप शामिल हैं। टीम ने हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, राई के कुलपति अशोक कुमार से मुलाकात कर कोच, एथलीट और सपोर्टिंग स्टाफ को भेजने का आग्रह किया। साई रोहतक सेंटर और खरखौदा के प्रताप स्पोर्ट्स स्कूल को भी आमंत्रित किया गया है। खेल विभाग ने सभी डिप्टी डायरेक्टर और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स ऑफिसर को कोचों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
टैलेंट को बचाना भी हमारी जिम्मेदारीः कुलपति
पं भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार की खेल नीति ने प्रदेश को देश की स्पोर्ट्स कैपिटल के रूप में स्थापित किया है। अब खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय मेडिकल सुरक्षा देना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस का लक्ष्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को चोट के कारण प्रभावित होने से बचाना है। यह कॉन्फ्रेंस मेडिकल साइंस और जमीनी स्तर की कोचिंग के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

Girish Saini 

